जाहू (हमीरपुर)। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिव्यांगों को जारी यूडीआईडी कार्ड का एचआरटीसी की कुछ डिपो की बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। भारत के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांग जनशक्तिकरण विभाग की ओर से दिव्यांगों के लिए भी यूनिक आईडी पहचान दी गई है। एचआरटीसी की ओर से अपने चालकों-परिचालकों यहां तक क्षेत्रीय प्रबंधक को अधिसूचना की पूरी जानकारी उपलब्ध न करवाए जाने से यह दिक्कत पेश आ रही है। दिव्यांगों की ओर से बस पास की सुविधा को प्राप्त करने के लिए अपने मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ ऑनलाइन आवेदन किया जाता है।
उसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिव्यांग के प्रमाण पत्रों के आधार पर एक सर्टिफिकेट और कार्ड को बनाया जाता है। इस कार्ड के बनने के बाद दिव्यांग को एक डिजिटल कार्ड के रूप में डाकघर के माध्यम से भेजा जाता है। कुछ दिव्यांगों को डाकघर के माध्यम से डिजिटल कार्ड नहीं मिलने की सूरत में विभाग की ओर से ऑनलाइन कार्ड निकालने की सुविधा उपलब्ध की गई है। जिन दिव्यांगों की ओर से ऑनलाइन कार्ड निकाला गया है, उसको कुछ एचआरटीसी डिपो के परिचालक मान्य करने से इंकार कर देते हैं। ऐसा ही मामला दिव्यांग प्यारेलाल और देशराज का सामने आया है। उन्होंने कहा कि संधोल मंडी बस में परिचालक को ऑनलाइन निकाला गया दिव्यांग कार्ड दिखाया तो मान्य करने से इंकार कर दिया और बस से उतरने क को कहा। इनका कहना है कि जब आधार कार्ड ऑनलाइन निकला हुआ मान्य है तो दिव्यांगों का कार्ड क्यों नहीं। दिव्यांगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, एचआरटीसी के मुख्य प्रबंधक से मांग की है कि ऐसे परिचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। उधर, एचआरटीसी हमीरपुर के क्षेत्रीय प्रबंधक राजकुमार ने कहा कि सभी कंडक्टरों को आदेश दिए गए हैं कि कार्ड को मान्य किया जाए। चाहे ऑनलाइन निकाला गया हो चाहे डाकघर के माध्यम से आया हो।