हमीरपुर। जिला हमीरपुर में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए एक विशेष प्रकृति परीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में आयुर्वेद विशेषज्ञ घर-घर जाकर लोगों के शरीर की प्रकृति का परीक्षण कर रहे हैं, ताकि उन्हें शरीर के तीन मुख्य दोषों (वात, पित्त और कफ) के बारे में जानकारी मिल सके।
25 नवंबर से शुरू हुआ आयुष विभाग का यह अभियान 25 दिसंबर तक चलेगा। अब तक एक हजार से अधिक लोगों के शरीर की प्रकृति का परीक्षण किया जा चुका है। अभियान के दौरान आठ हजार लोगों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। विशेषज्ञ शरीर की प्रकृति का परीक्षण कर समस्या का समाधान भी बता रहे हैं, जिससे लोग अपने स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से समझ और नियंत्रित कर सकते हैं।
आयुष मंत्रालय ने इस अभियान को डिजिटल बनाने के लिए एक एप तैयार किया है। इसके माध्यम से लोग अपनी सेहत से संबंधित जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इस एप में एक प्रश्नावली दी गई है, जिसमें लोग अपनी सेहत के बारे में जानकारी भरते हैं। सभी जानकारियां सबमिट करने के बाद एप के माध्यम से लोगों को उनके शरीर की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के बारे में बताया जाता है। साथ ही, उन्हें यह भी सलाह दी जाती है कि उन्हें क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, और दिनचर्या में कौन से व्यायाम करने चाहिए।
प्रकृति परीक्षण अभियान में जिला के लोग काफी रूचि दिखा रहे हैं। एक हजार से अधिक लोगों के शरीर की प्रकृति का परीक्षण किया जा चुका है। आठ हजार लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सभ नागरिकों से आग्रह है कि कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर भाग लें। इससे शरीर की प्रकृति की जानकारी मिलेगी और समय-समय पर आयुष से संंबंधित जानकारी प्रदान की जाएगी।
-डॉ. बृज नंदन शर्मा, जिला आयुष अधिकारी, हमीरपुर