कस्बे में ठंडा पानी उपलब्ध कराने के मकसद से दो साल पूर्व करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस बजट से 48 वाटर कूलर लगवाए गए। जल्दबाजी में हुए इस कार्य में बिजली का कनेक्शन तक नहीं लिया। साथ ही जल संस्थान से भी अनुमति नहीं ली।
हालत यह है कि करीब छह स्थानों के वाटर कूलर गायब हैं। वहीं दो दर्जन से ज्यादा वाटर कूलर बंद हैं। इधर, भीषण गर्मी के बावजूद बंद पड़े वाटर कूलरों को संचालित करने में नगर पालिका ध्यान नहीं दे रही है। हालांकि नगर पालिका अपने बार्ड सदस्यों को खुश करने के लिए 22 स्थानों पर समबर्सिवल पंप लगवाने की जुगत में है।
नगर पालिका में पिछले दो वर्ष पूर्व बिना किसी टेंडर के कुछ वाटर कूलर और समबर्सिवल लगाने का प्रस्ताव किया था। धीरे-धीरे इन वाटर कूलरों की संख्या 48 पहुंच गई। इसके लिए करीब एक एक करोड़ रुपये की धनराशि भी खर्च कर दी गई। हालत यह है कि मनमानी तरीके से चहेतों के यहां लगवाए गए वाटरकूलरों का कहीं अता-पता नहीं है।
कपसा मार्ग में दो, मलीकुआं चौराहा, छिमौली चौराहा, काशीराम कॉलोनी, अरतरा तिराहा, स्टेशन मार्ग, सैयद बाबा, बड़ा चौराहा जैसे कई स्थानों के वाटर कूलर खराबी के चलते बंद पड़े हैं। वहीं काशीराम कॉलोनी, छिमौली मार्ग, कोतवाली के निकट स्थित पार्क, कोतवाली, सब्जी मंडी, बड़ा चौराहा के वाटर कूलरों की मशीनें ही गायब हैं।