हमीरपुर। स्वास्थ्य खंड टौणी देवी के अंतर्गत वीरवार को विश्व मलेरिया दिवस पर स्वास्थ्य उपकेंद्र भिड़ा के गांव हलाना में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान खंड स्वास्थ्य शिक्षक कमल हेमंत मनकोटिया ने कहा कि विश्व मलेरिया दिवस का इतिहास 2007 से है। पहला विश्व मलेरिया दिवस 25 अप्रैल 2008 को मनाया गया था। तब से यह हर वर्ष मनाया जाता है। दुनिया भर में मलेरिया रोग को नियंत्रित करने के प्रयासों पर जोर देने और बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल या दिन मनाया जाता है। मलेरिया एक गंभीर बीमारी है जो हर वर्ष लाखों लोगों की मौत का कारण बनती है। मलेरिया एक प्रकार के परजीवी से होने वाली बीमारी है। यह संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2022 में 6 लाख से अधिक लोगों की मलेरिया के कारण मृत्यु हुई थी। भारत में भी हर साल बड़ी संख्या में मलेरिया के मामले रिपोर्ट किए जाते हैं। मलेरिया के लक्षणों में आमतौर पर फ्लू के लक्षण एक समान होते हैं। इसमें रोगी को बुखार, पसीना आना, ठंड के साथ सरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, सांस लेने में दिक्कत, दस्त, मितली और उल्टी भी हो सकती है। जैसे-जैसे मलेरिया बढ़ता जाता है, शरीर में खून की कमी हो जाती है और यह पीलिया का कारण भी बन सकता है। मलेरिया की सबसे गंभीर स्थिति कोमा होने का भी जोखिम देखा जाता है।
स्वास्थ्य शिक्षक ने कहा कि गर्मियों का मौसम अधिकतर बीमारियों का कारण होता है। इसमें पीलिया या दस्त इत्यादि सभी शामिल हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे साफ सुथरा भोजन करें तथा स्वच्छ जल या पानी को उबालकर ही पीएं।