हमीरपुर। राजकीय प्राथमिक पाठशाला घंघोट में बंदरों के आतंक से अध्यापक और विद्यार्थी खासे परेशान हैं। स्कूल में अध्यापक बच्चों को शिक्षा देने के स्थान पर उन्हें बंदरों से बचाने के लिए प्रहरी की भूमिका निभाने को मजबूर हैं।
दोपहर के समय खाना खाते समय अध्यापकों को स्कूल के प्रांगण में डंडे लेकर खड़े होना पड़ता है, क्योंकि जैसे ही बच्चों को खाना परोसा जाता है तो बंदर स्कूल के चारों ओर एकत्रित हो जाते हैं और कई बार बच्चों के खाने पर टूट पड़ते हैं। ऐसे में बच्चों को खाना खिलाने में काफी मुश्किलें पैदा होती हैं।
मामला इतना अधिक बढ़ गया है कि अभिभावकों को स्वयं स्कूल में आकर बच्चों को छोड़ना पड़ रहा है। इससे कुछ दिन पूर्व भी एक बंदर ने चौथी कक्षा की छात्रा पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। घायल छात्रा का इलाज अभी भी अस्पताल में करवाया जा रहा है।
राजकीय प्राथमिक पाठशाला घंघोट में प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक 20 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। अकेले प्री-प्राइमरी वर्ग में तीन से पांच वर्ष तक के सात विद्यार्थी दाखिल हैं। जंगल के साथ स्थित होने के कारण अक्सर बंदर स्कूल में पहुंच जाते हैं।
स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक में अभिभावक समस्या को लेकर कई बार चर्चा कर चुके हैं, लेकिन अभी तक हल नहीं निकल पाया है। मजबूरन अभिभावक बच्चों को अन्य स्कूलों में दाखिल करवाने पर विचार कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि वन व शिक्षा विभाग को समस्या को लेकर उचित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
कोट
स्कूल की ओर से कोई भी शिकायत नहीं आई है। यदि ऐसा मामला है तो संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि समस्या का समाधान किया जा सके।
-कमल किशोर, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, हमीरपुर