संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले के 536 सरकारी स्कूलों में पिछले पांच माह से मिड-डे मील योजना का बजट जारी नहीं हुआ है। हालात ऐसे हैं कि बजट के अभाव के कारण कई स्कूल शिक्षकों को अपनी जेब से या स्थानीय दुकानदारों से उधार पर राशन लाकर विद्यार्थियों के लिए मध्याह्न भोजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
अगस्त से अब तक योजना के तहत एक भी रुपया जारी नहीं हुआ है। ऐसे में अब दुकानदारों ने भी शिक्षकों को उधार देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। मिड-डे मील योजना के तहत प्री-प्राइमरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जिले के छह शिक्षा खंडों में करीब 25 हजार विद्यार्थी इस योजना पर निर्भर हैं।
शिक्षकों व अभिभावकों का कहना है कि मिड-डे मील को पौष्टिक बनाने के लिए सरकार की ओर से हरी सब्जियां, अंडे और दालों की सप्लाई के निर्देश तो दिए गए हैं, लेकिन समय पर बजट जारी करने में लापरवाही बरती जाती है। विद्यार्थियों को भोजन से वंचित नहीं किया जा सकता, इसलिए शिक्षक मजबूरी में दुकानों से सामग्री उधार लेकर भोजन बनवा रहे हैं, लेकिन अब चार माह से अधिक समय बीत गया है, ऐसे में योजना को बजट के बिना चलाना संभव नहीं है।
वहीं, आसपास के दुकानदार भी अब उधार देने में आनाकानी करने लगे हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग से शीघ्र बजट जारी करने की मांग की है।