औषध पौध उद्यान जोगिंद्रनगर में रखे औषधिय पौधे। -स्रोत : जागरूक पाठक
रंगस (हमीरपुर)। हिमाचल प्रदेश में आयुष के तहत चार औषध पौध उद्यान दुर्लभ और विलुप्त हो रही औषधीय प्रजातियों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। इन उद्यानों के माध्यम से औषधीय पौधों की पहचान, शोध, कृषि पद्धतियों का विकास और पौधशालाओं की स्थापना जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इससे जहां राज्य की औषधीय क्षमता मजबूत हो रही है, वहीं किसान भी औषधीय पौधों की व्यावसायिक खेती कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
मंडी जिला के जोगिंद्रनगर स्थित औषध पौध उद्यान में मुख्य रूप से तेजपत्ता, मुस्की कर्पूर, रुद्राक्ष और हरड़ जैसे औषधीय पौधों पर शोध व संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। वहीं, हमीरपुर के नेरी में जलवायु के अनुसार चंदन, नीम, कुटज, गंभारी, खैर, जामुन और नागकेसर जैसी प्रजातियों की नर्सरी विकसित की गई है।
वहीं बिलासपुर के झलेड़ा स्थित औषध पौध उद्यान केंद्र में कढ़ीपत्ता, शतावरी और पारिजात जैसे औषधीय पौधों का संरक्षण किया जा रहा है। शिमला के रोहड़ू में सरिबासा धुमरेड़ा स्थित उद्यान में अतिश, कुटकी, चोरा और मुरा जैसी पहाड़ी प्रजातियों पर शोध व संरक्षण का कार्य चल रहा है।
जोगिंद्र नगर हर्बल गार्डन के परियोजना अधिकारी उज्ज्वलदीप शर्मा ने कहा कि जलवायु के आधार पर स्थापित इन औषध पौध उद्यानों में निरंतर शोध और संरक्षण का कार्य जारी है। प्रजातियों की पहचान, पौधशालाओं का विकास और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को समय-समय पर लागू किया जा रहा है।