हमीरपुर। कोरोना वायरस के कारण जारी कर्फ्यू और लॉकडाउन के कारण लोग पहले ही अपने घरों में रहने के कारण परेशान हैं, ऊपर से मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के चिकित्सकों और दवाई विक्रेताओं ने मरीजों का मर्ज बढ़ा रखा है। बीमार मरीजों को कई औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कर्फ्यू पास बनाने पड़ रहे हैं। लेकिन, जब इन सब औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं तो यहां पर चिकित्सकों के नखरों के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, चेकअप के दौरान जब चिकित्सक पर्ची पर पांच दिन की दवाई का कोर्स पूरा करने के लिए लिख रहा है तो अस्पताल परिसर में खुली दवाई की दुकान के सेल्समैन दवाई की गोलियों का पत्ता काटने में आनाकानी कर रहे हैं। मरीजों को पांच गोलियों के बजाय दस और बीस गोलियों का पत्ता थमाया जा रहा है।
हमीरपुर अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे हमीरपुर के सुभाष चंद शर्मा ने बताया कि वह और उनकी बेटी बीमार हैं। सर्दी व जुकाम के कारण उन्होंने पहले कर्फ्यू पास बनाया और उसके बाद मेडिकल कालेज हमीरपुर पहुंचे। जहां पहले उन्हें इमरजेंसी में भेज दिया। लेकिन, इमरजेंसी में बैठे चिकित्सकों ने उन्हें दूसरी जगह बैठे चिकित्सक के पास भेज दिया। जबकि, दोनों काउंटर पर चिकित्सक अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त रहे। बार-बार उन्हें और उनकी बेटी को इधर से उधर घुमाया गया। अंत में एक चिकित्सक ने उनका चेकअप किया और दवाइयां लिखीं। उधर, गसोता के रहने वाले विशाल पठानिया ने बताया कि वह एक मरीज को लेकर अस्पताल आए थे। चेकअप के बाद डाक्टर ने पांच दिन दवाई का कोर्स पूरा करने के लिए कहा। अस्पताल के सरकारी काउंटर पर दवाइयां नहीं मिलीं तो सिविल सप्लाई के मेडिकल स्टोर पर चले गए। जहां पर सेल्समैन ने उन्हें पांच दिन की जगह बीस दिन की दवाइयां थमा थीं। उनके मरीज के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह सारी दवाइयां खरीद सकते। वहीं चिकित्सक ने भी केवल पांच दिन के लिए दवाई खाने के लिए कहा था। सुभाष शर्मा और विशाल पठानिया ने जिला प्रशासन से इस बारे में उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
उधर, हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि वह भोटा में आए ऊना के कोरोना पॉजिटिव मरीज के कार्य में व्यस्त हैं। फिर भी अगर ऐसा मामला है तो जांच कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।