हमीरपुर। संगीत केवल विषय नहीं, बल्कि साधना है। इसमें परिपक्वता निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण से आती है।
यह बात राजकीय महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. मधुर स्वर मिश्रा ने शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मारक राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर में आयोजित अंतर-महाविद्यालय युवा उत्सव ग्रुप-दो (संगीत) के चौथे दिन विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।
प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय युवा उत्सव में प्रदेशभर के विद्यार्थियों ने विभिन्न संगीत प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. मधुर स्वर मिश्रा का महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिंह और आयोजन समिति ने हिमाचली टोपी पहनाकर स्वागत किया तथा स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि प्रतियोगिता में पुरस्कार मिलना ही प्रतिभा का एकमात्र मापदंड नहीं है। इसका उद्देश्य अपनी कला का प्रदर्शन करने, दूसरों से सीखने और स्वयं में सुधार करने का अवसर प्राप्त करना है।
आयोजन सचिव डॉ. पूनम शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को चौथे दिन शास्त्रीय एकल गायन में 12, शास्त्रीय ताल वाद्य में आठ, शास्त्रीय गैर-ताल वाद्य में 19, सुगम गायन में 28, भारतीय समूह गान में 20 और लोकगीत प्रतियोगिता में 39 टीमों ने भाग लिया।
इसके अलावा पाश्चात्य एकल गायन में 21 और पाश्चात्य वाद्ययंत्र एकल प्रतियोगिता में 12 टीमों ने प्रस्तुतियां दीं। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिंह ने बताया कि युवा उत्सव के अंतिम दिन शनिवार को लोक वाद्यवृंद प्रतियोगिता होगी, जिसमें 13 टीमें भाग लेंगी।
दोपहर 12:30 बजे समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के खेल एवं युवा कार्यक्रम निदेशक प्रो. संजय शर्मा मुख्य अतिथि होंगे। समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।
हमीरपुर कॉलेज में युवा उत्सव के दौरान प्रस्तुति देते प्रतिभागी। स्रोत : संस्थान