बाजार बंद होने से नहीं मिली रोजमर्रा जरूरत की वस्तुएं
रविवार को अवकाश के दिन खरीदारी करते हैं कर्मचारी वर्ग
दूध की सप्लाई न होने से दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान
दूध सप्लायर दे रहे घाटे का तर्क, पचास फीसदी रह गई डिमांड
अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। जिले भर में रविवार को बाजार बंद रहने से लोगों को रोजमर्रा की चीजों के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिला में अधिकतर मेडिकल स्टोर, किराना और सब्जियों की दुकानें बंद रहीं। गांधी चौक हमीरपुर में दिनभर सन्नाटा रहा। जिला मुख्यालय पर जो दुकानें खुली थीं, वहां पर दूध और दही नहीं मिला। दुकानदारों ने बताया कि रविवार को दूध की पंजाब से होने वाली आपूर्ति नहीं हुई। दूध सप्लायर भी घाटे का तर्क देकर रविवार को दूध की आपूर्ति करने से इंकार करते रहे। मेट्रो दूध के अधिकृत सप्लायर तेज प्रकाश चोपड़ा ने कहा कि पूर्व में दूध की खपत चार हजार लीटर से अधिक थी, जो वर्तमान में 1700 से 1800 लीटर रह गई है। पंजाब से दूध मंगवाने के लिए उन्होंने लोन पर गाड़ियां खरीदी हैं, जिनकी मासिक बैंक किश्त जाती है। इसके अलावा दूध की आपूर्ति के लिए दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों को वेतन देना पड़ता है। डीजल की दाम भी बढ़े हैं। कुलमिलाकर दूध का कारोबार घाटे का सौदा साबित हो रहा है। कम खपत के कारण उन्होंने रविवार को दूध की सप्लाई नहीं करने का निर्णय लिया है। कुछ ऐसा ही हाल वेरका और अन्य दूध कंपनियों का है। वहीं सरकारी और निजी कंपनियों में सेवारत कर्मचारियों के लिए रविवार का दिन ही खरीदारी के लिए होता है। लेकिन किराना और सब्जी के अलावा अन्य दुकानें बंद रहने से उन्हें भी दिक्कतें पेश आईं।
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बार्बर की दुकानें बंद, शराब ठेके खुले
जिले भर में रविवार को बार्बर की दुकानें बंद रहीं। जबकि शराब ठेके खुले रहे। प्रदेश सरकार की अधिसूचना का लोग जमकर मजाक उड़ा रहे हैं। लोगों सुरेश कुमार, राजीव, सुनील शर्मा, प्रदीप ठाकुर, ओम प्रकाश और अरुण शर्मा का कहना है कि रविवार को छुट्टी के दिन कर्मचारियों समेत अन्य लोग बार्बर की दुकानों पर कटिंग करवाते हैं, लेकिन बार्बर की दुकानें बंद रहने से कटिंग नहीं करवा पाए।
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हमीरपुर में नहीं चलीं निजी बसें
जिला हमीरपुर में रविवार को छुट्टी के चलते हार बार की तरह निजी बसें नहीं चलीं। मंडी और बिलासपुर से कांगड़ा की ओर चलने वाली इक्का-दुक्का बस ही केवल नेशनल हाइवे पर नजर आई। एचआरटीसी ने भी केवल लंबे रूट पर ही सेवाएं दीं। ग्रामीण रूटों पर बसें न होने से यात्रियों को टैक्सियों में सफर कर जेब ढेली करनी पड़ीं।
हमीरपुर में बस स्टैंड पर खड़ी इक्का दुक्का बसें।- फोटो : Hamirpur-HP