हमीरपुर। वैश्विक महामारी कोरोना ने देश और प्रदेश के कई अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों की मौतों के आंकड़ों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। हमीरपुर जिले में 32 स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं, जहां पर सालों से स्टाफ ही नहीं। स्टाफ के अभाव में इन उप-स्वास्थ्य केंद्रों के दरवाजों पर ताले लटके हैं। मरीजों को उपचार के साथ ही कोरोना के लक्षण का पता लगाना मुश्किल हो रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग झोलाछाप के पास इलाज करवाने को मजबूर हैं, जहां मामला बिगड़ने के बाद कई लोग दम तोड़ रहे हैं।
कोरोनाकाल में महामारी के डर से लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं। दूसरा छोटी-मोटी बीमारियों के उपचार के लिए खोले गए लोकल स्तर पर स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ताले लटके हैं। विभाग और सरकार ने लोगों को लोकल स्तर पर दवाइयां व अन्य उपचार उपलब्ध करवाने की दृष्टि से स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले थे। लेकिन, कई स्वास्थ्य उपकेंद्र स्टाफ न होने की वजह से बंद हैं। जिला हमीरपुर में कुल 157 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में से 32 में स्टाफ नहीं है। इस कारण यह बंद पड़े हैं। हालांकि, कुछेक पर डेपुटेशन पर महिला या पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता लगाए हैं, लेकिन वह भी सप्ताह में दो दिन ही आते हैं और दोपहर डेढ़ बजे डिस्पेंसरी पर ताला लगाकर चले जाते हैं। फील्ड वर्क के चलते डेढ़ बजे ही यह डिस्पेंसरी से चले जाते हैं।
इन उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर पेश आ रही परेशानी
जिले के स्वास्थ्य उपकेंद्रों में सुजानपुर का चौरी स्थित भटेरा, डूहक, भलेठ, करोट, नालाही, धैल, टिहरा, रंगड़, बौरु, बलोह, खियाह, पटनोन, बड़सर के कुठियाना, चकमोह, ज्योली देवी, लोहारडा, उसनाड़कलां, धंगोटा, फगोटी, नादौन के बुनी, बलडूहक, कोहला, बेला, जनसूह, भूंपल, गलोड़ के कोटलु, पपलाह, गाहलियां, बाड़ी फरनोल, धनेड, जंगल रोपा और भोरंज के भोखर स्वास्थ्य उपकेंद्र में न तो पुरुष और न ही महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता है।
यहां लटके मिले ताले
स्वास्थ्य उपकेंद्र बलडूहक में अमर उजाला की टीम जब गई तो वहां पर ताला लगा था। यहां सप्ताह के दो दिन ही महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता डेपुटेशन पर आती हैं। स्वास्थ्य उपकेंद्र बेला में भी ताला लटका हुआ था। यहां स्वास्थ्य कर्मचारी तभी आते हैं जब कोई टीकाकरण होता है या कोई विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम। स्थानीय लोगों से भी बात की तो पाया कि लोगों को अगर छोटी बीमारियों के लिए दवाई लेनी हो तो सिविल अस्पताल या मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। कोरोना काल में घरद्वार स्थित ऐसे स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए।
उधर, सीएमओ डॉ. आरके अग्निहोत्री ने कहा कि 32 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी है। यहां डेपुटेशन पर कर्मचारी भेजे जाते हैं।
क्या कहते हैं लोग
सप्ताह में दो दिन ही आती हैं स्वास्थ्य कार्यकर्ता
बलडूहक स्वास्थ्य उपकेंद्र के साथ लगते गांव के ग्रामीण संजल परमार ने कहा कि यहां सप्ताह में दो दिन ही महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता आती हैं। कोरोना काल में लोगों को घरद्वार पर दवाइयां अगर चाहिए हों तो सबसे पहले यहीं आते हैं, लेकिन यहां अक्सर ताले लटके रहते हैं।
स्वास्थ्य उपकेंद्रों में स्थायी स्टाफ तैनात हो
मोहिंदर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य उपकेंद्र पर ताला लगा रहने के कारण लोगों को छोटी मोटी बीमारी की दवाई के लिए भी या तो निजी मेडिकल स्टोर व क्लीनिक या मेडिकल कॉलेज की ओर रुख करना पड़ता है। सरकार को चाहिए कि स्वास्थ्य उपकेंद्रों में भी स्थायी स्टाफ तैनात करके यहां सुविधा देनी चाहिए।
स्वास्थ्य उपकेंद्र में दवा मिल जाए तो बाहर जाने से बचेंगे
कैप्टन देव राज (सेवानिवृत्त) ने कहा कि वृद्धों को दूर जाने की बजाए अगर गांव के स्वास्थ्य उपकेंद्र में ही दवाइयां मिल जाएं तो बाहर जाने से भी बचेंगे और कोविड का खतरा भी कम होगा। इन्होंने स्वास्थ्य उपकेंद्रों में स्थायी स्टाफ तैनात कर सुविधा देने की मांग की है।