हमीरपुर में जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए लाबिंग शुरू हो गई है। हालांकि भाजपा इतिहास दोहराने के करीब है, लेकिन कांग्रेस भी पासा बदलने की जीतोड़ कोशिश में जुट गई है।
अगर निर्दलीयों का भाजपा को समर्थन मिल जाता है तो भाजपा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष की सीट हथिया सकती है। शनिवार को दो निर्दलीय जिला परिषद सदस्य पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से मिले। भाजपा को दो ही की दरकार है जबकि कांग्रेस को जादुई आंकड़ा 10 तक पहुंचने के लिए चार सदस्यों की जरूरत है।
चार ही प्रत्याशी आजाद जीते हैं। भाजपा को अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए कांग्रेस को चार अन्य पार्षदों का समर्थन चाहिए। जिला परिषद में महज तीन निर्दलीय और एक कामरेड से संबंध रखने वाली जिला परिषद सदस्य हैं। तीनों निर्दलीय चुनाव जीतने वाले भाजपा के बागी हैं।
इसमें से बारी वार्ड से वीरेंद्र ठाकुर और भोरंज वार्ड से जीते पवन चंदेल दोनों ने शनिवार को समीरपुर पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के दरबार में हाजिरी लगाई।
धनेटा वार्ड से चुनाव जीतने वाले लेखराज को अनुशासनहीनता के चलते जिला भाजपा पार्टी से निष्कासित भी कर चुकी है। निष्कासित सदस्य और कामरेड का भाजपा को समर्थन मिलना मुश्किल है। अगर लेखराज और एक कामरेड कांग्रेस का साथ देते हैं तो भी यह आंकड़ा 8 के आसपास पहुुंचता है।
अध्यक्ष पद का ऑफर बना सकता है गेम
भाजपा को अध्यक्ष पद के लिए कड़ी मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी, जबकि कांग्रेस को चार सदस्यों का साथ पाने के लिए बड़ी कुर्बानी देनी पड़ सकती है।
यहां निर्दलीयों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि वो अगर अध्यक्ष पद की डिमांड करें तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों को सोचने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
अध्यक्ष पद का त्याग करने के अलावा न तो कांग्रेस के पास और कोई विकल्प है और न ही बीजेपी के पास। अध्यक्ष पद का फैसला निर्दलीयों पर निर्भर है। बीते बीस सालों से चार बार जिप अध्यक्ष पद पर बीजेपी का ही कब्जा रहा है।