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Hamirpur (Himachal) News: जीवन बचाने वाली दवाएं अब नशा भी देने लगीं

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ड्रग इंस्पेक्टर दिनेश गौतम मेडिकल स्टोरों की दवाईयों की जांच करते व रिकॉर्ड खंगालते हुए। संवाद
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युवाओं तक आसानी से पहुंच बनी चुनौती
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नशा लेते पकड़े गए युवाओं ने किया खुलासा,
रिटेल में तीस से 50 रुपये में बेची जा रही खुली गोलियां, विभागीय जांच पर उठे सवाल
विभागीय जांच में मेडिकल स्टोर का रिकाॅर्ड दुरुस्त, बीते छह माह में कोई कार्रवाई नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी

हमीरपुर। जिले में जीवन रक्षक दवाएं युवाओं की रगों में नशे के रूप में दौड़ रही हैं। आपात स्थिति में जिंदगी बचाने वाली दवाओं का इस्तेमाल अब नशे के लिए हो रहा है। इसका खुलासा हाल ही में नशा लेते पकड़े गए युवाओं ने किया है। एक ढाबा संचालक से ये युवा ड्रग खरीदते थे। सेहत के लिए घातक इन नार्कोटिक्स और साइकोट्रोपिक ड्रग का बिना चिकित्सीय सलाह और देखरेख के इस्तेमाल हो रहा है। हैरत की बात यह है कि जीवन रक्षक ये दवाएं नशे के दलदल में फंसे युवाओं को तीस से पचास रुपये में उपलब्ध हो रही हैं। मेडिकल स्टोर से युवाओं तक चिट्टे के मुकाबले ये दवाएं आसानी से उपलब्ध हो जा रही है। युवाओं तक यह आसान पहुंच ही पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई है। जिले में 300 से अधिक मेडिकल स्टोर हैं। ऐसे में पुलिस की निगरानी और कार्रवाई भी व्यापक रूप से संभव नहीं है।

बिना डाक्टरी सलाह के इन दवाओं को कैसे मेडिकल स्टोरों में बेचा जा रहा है यह विभागीय निगरानी तंत्र पर बड़ा सवाल है। कायदे से स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्टोर के रिकाॅर्ड को नियमित तौर पर खंगाला जाता है लेकिन पिछले छह माह में एक भी मेडिकल स्टोर के रिकाॅर्ड में कोई खामियां स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिली हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इन मेडिकल स्टोरों की जांच में पिछले छह माह में कोई खामी नहीं पाई गई है। इसके चलते किसी स्टोर मालिक पर कोई कार्रवाई भी नहीं की गई है। जबकि जिला मुख्यालय में ही दो माह से एक ढाबा संचालक मेडिकल स्टोर से दस हजार रुपये की दवाइयों की खरीद कर रिटेल में इन्हें बेच रहा था। हमीरपुर ही नहीं बड़सर और जिले के अन्य हिस्सों में युवाओं के जीवन रक्षक दवाओं के नशे के रूप में प्रयोग के मामले सामने आ चुके हैं।
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दवा को पानी में घोल कर इंजेक्शन ले रहे युवा

दरअसल बिना चिकित्सीय सलाह के जीवन रक्षक दवाओं की बिक्री पर रोक है। बावजूद इसके धड़ल्ले से नशे के दलदल में फंसे युवा इन दवाओं को बारीक पीसकर पानी में घोलकर इंजेक्शन के जरिये नशे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो बाजू, टांग और पैर के साथ गुप्तांगों पर नशीले इंजेक्शन लेने के मामले सामने आ रहे हैं। चिट्टे की तरह जीवन रक्षक दवाओं का यह नशा भी बेहद घातक है। महज दो से तीन माह के भीतर ही यह नशा शरीर को खोखला बना रहा है।



पुलिस कार्रवाई के बाद ड्रग इंस्पेक्टर ने खंगाला रिकाॅर्ड
हथली खड्ड पुल के पास नशा करते युवकों का वीडियो वायरल होने के बाद जिलाभर के मेडिकल स्टोरों में जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है। वीरवार को जिला ड्रग इंस्पेक्टर ने मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के पास सभी मेडिकल स्टोरों की जांच की और बीते दो से तीन माह का रिकाॅर्ड खंगाला है। इस कड़ी में अन्य मेडिकल स्टोरों का रिकार्ड भी खंगाला जाएगा। हालांकि, सवाल उठ रहा है कि बीते छह माह में आखिर विभाग की जांच में क्या यह रिकाॅर्ड दुरुस्त था। अगर जांच हुई है तो क्या रिकाॅर्ड में कोई खामी नहीं मिली। विभाग का दावा है कि जिन मेडिकल स्टोरों के संचालकों के पास दवाई की बिक्री में अनियमितताएं पाई जाएंगी उनपर कार्रवाई की जाएगी। यहां पर एक मेडिकल स्टोर से बीते दो माह में 10 हजार की दवाएं आरोपी ढाबा संचालक को बेची गई हैं।





कोट्स



मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीन कुमार ने कहा कि नियमों के तहत रिकाॅर्ड की जांच की जाती है। बीते छह माह में 300 के करीब मेडिकल स्टोरों की जांच में कोई अनियमितताएं सामने नहीं आई है। जीवन रक्षक दवाओं को बिना डाॅक्टर की राय के बिक्री नहीं किया जाता है। पर्ची का रिकाॅर्ड मेडिकल स्टोर को रखना होता है। इस रिकाॅर्ड की नियमित रूप से जांच होती है।
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एसपी हमीरपुर भगत सिंह ठाकुर ने कहा कि पुलिस जांच के दायरे में आए मेडिकल स्टोर मालिक से पूछताछ की गई है। मामले में जांच के दायरे में आने वाले स्टोर की भी जांच की जाएगी। बैंकिंग, नकद लेनदेन की संभावनाओं को खंगाला जा रहा है।
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