हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने पदोन्नति मामले में प्रवक्ताओं से अन्याय किए जाने का आरोप लगाया है। संघ का कहना है कि प्रधानाचार्य के पदों पर मुख्याध्यापकों और प्रवक्ताओं के बीच पदोन्नति 50:50 फीसदी का अनुपात रखा गया है जो सही नहीं है। यह अनुपात मुख्याध्यापकों एवं स्कूल प्रवक्ताओं की संख्या के आधार पर होना चाहिए।
प्रवक्ता संघ ने सरकार से यह अनुपात 95 और 5 फीसदी किए जाने की मांग की है। संघ के चेयरमैन मुश्ताक मोहम्मद ने कहा कि स्कूल प्रवक्ताओं को पदोन्नति के अवसर बहुत कम हैं। वहीं, प्रदेश में दूसरे शिक्षकों को कई तरह के पदोन्नति अवसर मौजूद हैं। स्कूल प्रवक्ताओं के लिए एकमात्र पदोन्नति प्रधानाचार्य के पद पर है।
संघ का तर्क है कि इस पदोन्नति को दो फीडिंग कैडर यानि प्रवक्ता और मुख्याध्यापकों के बीच राइडर की शर्त लगाकर 50-50 फीसदी के अनुपात में बांटा गया है जो सरासर गलत है। प्रदेश में प्रवक्ताओं की संख्या वर्तमान में 18,500 के लगभग है। मुख्याध्यापकों की संख्या मात्र 840 के लगभग है।
ऐसे में वर्तमान अनुपात प्रवक्ताओं क साथ घोर अन्याय है। कुछ शिक्षक संगठन टीजीटी वर्ग की संख्या को मुख्याध्यापकों की संख्या के साथ जोड़कर गलत आंकड़े सरकार और विभाग के समक्ष दर्शाते हैं। टीजीटी वर्ग प्रवक्ता पद पर 50 फीसदी पदोन्नति प्राप्त करता है। 840 मुख्याध्यापकों के पदों पर सौ फीसदी तक पदोन्नति प्राप्त करता है जबकि स्कूल प्रवक्ता पूरे सेवाकाल में एक ही पदोन्नति का हकदार होता है।
प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने सरकार से स्कूल प्रवक्ताओं और मुख्याध्यापकों की संख्या के आधार पर वर्तमान पदोन्नति अनुपात में संशोधन कर अनुपात को 95 और 5 फीसदी किए जाने की मांग की है। संघ ने सरकार से मांग की है कि वर्तमान में राइडर की शर्त को हटाकर रोस्टर प्रणाली लागू की जाए।