करोट की सुमन बुटीक में सिलाई करते हुए। संवाद
- फोटो : 1
हमीरपुर। आर्थिक तंगी को चुनौती देते हुए करोट गांव की सुमन ने स्वरोजगार की राह अपनाकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि दो अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराकर मिसाल पेश की है।
सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच सुमन ने अपने सिलाई-कढ़ाई के हुनर को व्यवसाय का रूप दिया और आज एक सफल बुटीक संचालित कर रही हैं। उनके पति दिहाड़ी मजदूरी का कार्य करते हैं और परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी ही था, जिससे घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता था।
ऐसे में सुमन ने घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। बचपन से ही उन्हें सिलाई और कढ़ाई का शौक था, जिसे उन्होंने शादी के बाद भी जारी रखा। शुरुआत में वह घर और आसपास की महिलाओं के कपड़े सिलती थीं, लेकिन धीरे-धीरे उनका काम बढ़ता गया।
इसके बाद उन्होंने अपने घर के एक हिस्से में छोटा सा बुटीक शुरू किया और नए-नए डिजाइन सीखने शुरू किए। समय के साथ उन्होंने डिजाइनर सूट, लेडीज परिधान, बच्चों के कपड़े और विभिन्न प्रकार की कढ़ाई का काम शुरू कर दिया।
आज उनके बुटीक में क्षेत्र की कई महिलाएं कपड़ों की सिलाई और डिजाइनिंग के लिए आती हैं। त्योहारों, शादियों और अन्य सामाजिक आयोजनों के दौरान उनके पास काफी कार्य रहता है, जिससे वह हर महीने अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने दो अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है।