जायका परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान जायका प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए। स्रत्रोत : संवाद
हमीरपुर। जाइका मुख्यालय के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना-2 के तहत चल रही नई कृषि पद्धतियों की समीक्षा के लिए परियोजना क्षेत्र का दौरा किया। यह पिछले दो वर्षों में जाइका कृषि परियोजना-2 का अंतरराष्ट्रीय मिशन का पांचवां दौरा है।
इस दल में शिनो काटो, ताकाहिरो कोइके (दोनों जाइका मुख्यालय के प्रतिनिधि), केन कुनीडा और युकारी इनागाकी (दोनों जाइका इंडिया से) शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति डॉ. नवीन ठाकुर और जाइका कृषि परियोजना-2 के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने दल को प्रगति की स्थिति की रिपोर्ट सौंपी।
जाइका मिशन प्रतिनिधिमंडल ने पपरोला संग्रह केंद्र का दौरा कर लाभार्थी किसानों, उत्पादक कंपनी और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिला सदस्यों के साथ भी बातचीत की। डॉ. सुनील चौहान ने कहा कि संग्रह केंद्र की स्थापना 2017 में परियोजना-1 के दौरान 36.77 लाख रुपये के कुल परिव्यय के साथ की गई थी। जाइका मिशन टीम ने पालमपुर में शिटाके खेती और प्रशिक्षण केंद्र (एससीटीसी) का दौरा कर कर्मचारियों और शिटाके उत्पादकों के साथ बातचीत की।
उन्होंने कहा कि यह केंद्र भारत में अपनी तरह का एक मॉडल केंद्र है, जहां लकड़ी के ब्लॉकों पर शिटाके मशरूम उगाए जाते हैं। अगस्त के अंत तक इस केंद्र ने 53.57 किलोग्राम सूखे मशरूम का उत्पादन किया और 65.575 किलोग्राम ताजा शिटाके मशरूम बेचे हैंं। केंद्र ने तैयार ब्लॉकों, ताजे और सूखे शिटाके मशरूम को बेचकर 3.31 लाख रुपये राजस्व अर्जित किया है।