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Hamirpur (Himachal) News: सुजानपुर में हर वार्ड को मिली ‘प्रधानी’, मनोज के अलावा कोई नहीं टिक पाया पांच साल

Mon, 04 May 2026 12:46 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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सुजानपुर (हमीरपुर)। नगर परिषद सुजानपुर में इस बार सत्ता की चाबी किस दल के हाथ जाएगी और महिला अध्यक्ष और उपाध्यक्ष किस वार्ड से चुनी जाएंगी, इसका फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद ही होगा। हालांकि नतीजों से पहले ही शहर में संभावित चेहरों और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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नगर परिषद के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो नौ वार्डों में हर वार्ड को कभी न कभी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद का प्रतिनिधित्व मिला है, लेकिन अध्यक्ष पद की कुर्सी कभी स्थिर नहीं रही। नगर पंचायत के दौर से लेकर नगर परिषद बनने तक अविश्वास प्रस्ताव, गुटबाजी और जोड़-तोड़ की राजनीति लगातार सुर्खियों में रही।
सिर्फ मनोज ठाकुर ही ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने दो कार्यकाल तक अध्यक्ष पद संभाला और वर्ष 2010 में पार्टी सिंबल पर सीधे चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की। इसके अलावा किसी भी अध्यक्ष ने पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया।
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वहीं, शहरवासियों की नजरें अब आगामी चुनाव के नतीजों पर टिकी हैं, जो नगर परिषद की सत्ता के समीकरण तय करेंगे। संवाद
हर वार्ड को मिला नेतृत्व का मौका
वार्ड नंबर-1 से रमन भटनागर ने करीब तीन वर्ष तक अध्यक्ष पद संभाला।

वार्ड नंबर-2 से शकुंतला देवी नगर पंचायत और बाद में नगर परिषद दोनों कार्यकालों में अध्यक्ष बनीं और करीब डेढ़-डेढ़ वर्ष तक जिम्मेदारी निभाई।

वार्ड नंबर-3 ने सबसे ज्यादा राजनीतिक पहचान बनाई। एससी महिला आरक्षण के दौरान ज्ञान कौर अध्यक्ष बनीं और करीब चार वर्ष तक पद संभाला। इसी वार्ड से मनोज ठाकुर दो कार्यकाल तक अध्यक्ष रहे। वर्ष 2010 में सीधे चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की। इसी वार्ड से तिलक राज उपाध्यक्ष भी रहे और अपना कार्यकाल पूरा किया।
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वार्ड नंबर-4 से कमलेश चौधरी उपाध्यक्ष बनीं।

वार्ड नंबर-5 से स्वर्गीय जगत राम, स्वर्गीय लक्ष्मण दास और जैसी राम विमल उपाध्यक्ष पद पर रहे।

वार्ड नंबर-6 से अशोक मेहरा अध्यक्ष बने, जबकि ओंकार स्वरूप उपाध्यक्ष रहे।

वार्ड नंबर-7 से पवन कुमार उपाध्यक्ष बने, लेकिन असामयिक निधन के चलते कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए।

वार्ड नंबर-8 से वीना धीमान अध्यक्ष बनीं, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के चलते करीब डेढ़ वर्ष बाद कुर्सी गंवानी पड़ी।

वार्ड नंबर-9 से राजकुमार शर्मा अध्यक्ष बने, लेकिन दो वर्ष बाद अविश्वास प्रस्ताव के कारण पद छोड़ना पड़ा।
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