हमीरपुर। जिला मुख्यालय हमीरपुर में बिना मंजूरी जमीन प्लॉट का मामला फिर शिमला पहुंच गया है। अब गेंद फिर सरकार के पाले में है। नगर नियोजन विभाग इन प्लॉटों पर हिमाचल प्रदेश टीसीपी एक्ट-1977 की धारा 16-सी की अवहेलना के चलते आपत्ति दर्ज कर चुका है। जबकि, जिला प्रशासन ने मामला सामने आते ही इस भूमि पर बेचे जाने वाले सभी प्लॉटों की रजिस्ट्री पर रोक लगा रखी है। अब जिन लोगों ने यहां पर भूमि खरीदी है, वह असमंजस में हैं।
जिला प्रशासन ने प्लॉट खरीदारों के आग्रह पर इस मामले को प्रदेश सरकार को भेजा था लेकिन, अभी तक कहीं से राहत नहीं मिल पाई है। जिला मुख्यालय हमीरपुर में हथली खड्ड के समीप कुछ कारोबारियों ने स्थानीय लोगों से जमीन खरीद कर खानगी तकसीम करवा ली थी। जिसके बाद कारोबारियों ने रेरा की अवहेलना करते हुए टीसीपी विभाग से मंजूरी लिए बगैर ही यहां पर कॉलोनी बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। कारोबारियों ने शुरू में दो दर्जन से अधिक प्लॉट बेच दिए लेकिन, इस बीच 6 अप्रैल 2018 को ‘अमर उजाला’ ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और भूमि की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी। इस दौरान राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों के तबादले भी हुए।
टीसीपी विभाग ने अब इस मामले को फिर से टीसीपी निदेशालय भेज दिया है। लेकिन, अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। जिसके चलते पूर्व में प्लॉट खरीद चुके खरीदार परेशान हो रहे हैं। चूंकि, अगर वह इस भूमि पर भवनों का निर्माण करते हैं तो भवन के नक्शे पास करवाने के अलावा पानी, बिजली समेत अन्य सुविधाएं जुटाने के लिए एनओसी नहीं मिल पाएगी। उधर, नगर नियोजन अधिकारी आशा मेहता ने कहा कि उन्होंने हथली खड्ड जमीन मामले की फाइल शिमला निदेशालय भेज दी है। प्रारंभिक जांच में कुछ खामियां सामने आई हैं। इस बारे में निदेशालय ही आगामी निर्णय लेगा। वहीं, हिमाचल प्रदेश नगर नियोजन विभाग के सचिव (आईएएस) सी पालरासू से फोन पर संपर्क किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।
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ये हैं कॉलोनी बसाने के लिए टीसीपी के नियम
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के नियमों के तहत आठ से अधिक प्लॉटों की बिक्री पर विभाग से भूमि की सब डिवीजन के लिए स्वीकृति जरूरी है। जबकि, पूरी कॉलोनी बसाने के लिए रेरा के तहत बिल्डर का पंजीकृत होना जरूरी है। कॉलोनी बसाने से पूर्व निर्धारित नियमों के तहत सड़क, बिजली ट्रांसफार्मर, पेयजल स्कीम, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, पार्क समेत अन्य मूलभूत सुविधाएं पंजीकृत बिल्डर को ही उपलब्ध करवानी होती हैं। बिना मंजूरी बेचे जाने वाले प्लॉटों पर कोई भवन निर्माण नहीं हो सकता।