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हिमाचल: हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने का दावा फर्जी, आईडेक्स ने किया खंडन

Thu, 29 Oct 2026 03:50 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)

सार

हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को भारतीय सेना के लिए ड्रोन विकसित करने के वास्ते 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने की खबर का खंडन हुआ है। आईडेक्स डीआईओ ने इस दावे को फर्जी बताया है। इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्टों में ग्रांट मंजूर होने की बात कही गई थी।

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सर्वेश शर्मा - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के छात्र सर्वेश शर्मा को भारतीय सेना के लिए ड्रोन विकसित करने के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने की खबर को लेकर नया तथ्य सामने आया है। रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने वाली संस्था इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स) और डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (डीआईओ) ने इस दावे को फर्जी बताया है।
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संस्था की ओर से 28 अक्टूबर 2026 को जारी स्पष्टीकरण के बाद ग्रांट मंजूर होने की खबर पर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सर्वेश शर्मा को सेना के लिए ड्रोन परियोजना विकसित करने के लिए 3.5 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत हुई है।

आईडेक्स और डीआईओ ने क्या कहा?
आईडेक्स और डीआईओ की ओर से जारी जानकारी में सर्वेश शर्मा को 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने के दावे को गलत बताया गया। यह दावा पिछले करीब दो महीने से चर्चा में था। इस स्पष्टीकरण के बाद ग्रांट से जुड़ी खबर को सही तथ्य के रूप में साझा करना उचित नहीं होगा। इस मामले में संस्था की आधिकारिक जानकारी को ही आधार माना जाना चाहिए।

पहले मीडिया रिपोर्टों में ग्रांट मिलने की बात आई थी
सितंबर 2026 में प्रकाशित कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को भारतीय सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन विकसित करने के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। इन खबरों में उनकी परियोजना का नाम ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ बताया गया था।

हालांकि, बाद में आईडेक्स और डीआईओ के स्पष्टीकरण ने ग्रांट मंजूर होने के दावे का खंडन कर दिया। इसलिए पहले प्रकाशित खबरों और संस्था की ओर से बाद में दी गई जानकारी के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है।

कम लागत वाले ड्रोन प्रोटोटाइप की भी हुई थी चर्चा
पहले प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में सर्वेश शर्मा के ड्रोन प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया गया था। इन रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने लगभग 87 हजार रुपये की लागत से ड्रोन का प्रोटोटाइप तैयार किया था। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया था कि उनकी टीम ने आईआईटी जोधपुर और कोणार्क कोर से जुड़ी ड्रोन प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया था और 10 लाख रुपये का पुरस्कार जीता था। हालांकि, ये विवरण मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं और इन्हें 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने के दावे से अलग देखा जाना चाहिए।
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ग्रांट को लेकर फैली खबर पर क्यों जरूरी है स्पष्टीकरण?
किसी छात्र या परियोजना को सरकारी अथवा संस्थागत आर्थिक सहायता मिलने की खबर महत्वपूर्ण होती है। ऐसी जानकारी प्रकाशित या साझा करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।

सर्वेश शर्मा के मामले में आईडेक्स डीआईओ के स्पष्टीकरण के अनुसार, 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने का दावा फर्जी है। इसलिए इस राशि को छात्र को मिली स्वीकृत आर्थिक सहायता के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
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