हमीरपुर। नगर परिषद हमीरपुर में लाखों की कीमत से खरीदे गए तीन डंपर और रेहड़ियां करीब 1 साल से जंग खा रहे हैं। इन डंपरों का प्रयोग शहर में कूड़ा करकट उठाकर कचरे को डंपिंग साइट में फेंकने के लिए होता था लेकिन, नगर परिषद ने वर्तमान में शहर के सभी 11 वार्डों में सफाई का काम निजी हाथों में सौंपा है। टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से शहर के सभी 11 वार्डों का कार्य सफाई ठेकेदारों को सौंपा गया है। जिसके चलते सफाई कर्मी पिछले 1 वर्ष से डोर टू डोर सूखा और गीला कचरा एकत्रित करते हैं। जिसके चलते नगर परिषद हमीरपुर की ओर से खरीदे गए डंपर और कूड़ा उठाने वाली रेहड़ियों व कूड़ेदान का कोई प्रयोग नहीं हो रहा। इससे जहां लाखों की मशीनरी खराब हो रही है वहीं, सरकार को भी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। सफाई कार्य निजी हाथों में सौंपने के कारण नगर परिषद की ओर से रखे गए सरकारी सफाई कर्मचारियों से भी वर्तमान में कोई दूसरा कार्य लिया जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक इन डंपर और रेहड़ियों का प्रयोग प्रदेश की ऐसी नगर परिषदों व पंचायतों में किया जा सकता है, जहां पर अभी तक डोर टू डोर कूड़ा उठाने की सुविधा नहीं है ताकि, सरकारी धनराशि का सदुपयोग हो सके। उधर, नगर परिषद हमीरपुर के रहने वाले अशोक ठाकुर, प्रदीप ठाकुर, अरुण शर्मा, ओम प्रकाश, संदीप और विवेक शर्मा ने कहा कि सरकारी धनराशि से खरीदे गए डंपर का सरकार को किसी दूसरी जगह प्रयोग करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो इन डंपरों को बेचकर होने वाली कमाई को सरकारी खजाने में जमा करवा देना चाहिए। वहीं, नगर परिषद हमीरपुर के ईओ केएल ठाकुर ने कहा कि नगर परिषद के सभी 11 वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा उठाने का कार्य निजी ठेकेदारों को सौंपा गया है। जिसके चलते नगर परिषद की मशीनरी का प्रयोग नहीं हो रहा है।