हमीरपुर। माता-पिता की मृत्यु से अनाथ हुए या फिर अन्य कारणों से मां-बाप के सानिध्य से महरूम बच्चों के पालक अभिभावकों को बाल बालिका सुरक्षा योजना के तहत प्रतिमाह 2000 रुपये की धनराशि दी जाती है। बच्चों के पालक अभिभावकों में उनके दादा-दादी, चाचा-चाची, ताया-ताई, भाई-भाभी, फूफा-फूफी, नाना-नानी या अन्य रिश्तेदार हो सकते हैं। 2000 रुपये के अलावा बेसहारा बच्चों के खातों में प्रतिमाह 500 रुपये भी जमा किए जाते हैं और 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर यह जमा राशि एकमुश्त इन्हें मिल जाती है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी हुक्म चंद शर्मा ने बताया कि हमीरपुर जिले में भी पात्र बच्चों को इस योजना का लाभ पहुंचाया जा रहा है। जिले में इस वर्ष 79 अनाथ एवं बेसहारा बच्चों के पालन पोषण के लिए उनके पालक अभिभावकों को प्रतिमाह यह राशि दी जा रही है।
छोटी उम्र में ही माता-पिता के गुजरने के बाद ऐसे बच्चों को अत्यंत विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें बाल आश्रमों की शरण लेनी पड़ती है। इन बच्चों के दर्द को समझते हुए सरकार ने उनके बेहतर पालन-पोषण और पारिवारिक माहौल में ही उनकी परवरिश के लिए बाल-बालिका सुरक्षा योजना आरंभ की है।
इसके अलावा अगर किसी बच्चे के पिता का देहांत हो गया हो और मां ने दूसरी शादी कर ली हो तथा वह बच्चे की देखभाल नहीं करती हो तो भी बच्चे को भी बाल-बालिका सुरक्षा योजना का लाभ मिल सकता है। यदि किसी बच्चे की मां का देहांत हो गया हो और पिता जेल में हो या माता-पिता दोनों जेल में हों तो वह बच्चा भी बाल बालिका सुरक्षा योजना का लाभ लेने के लिए पात्र है।