सुजानपुर(हमीरपुर)। हाथों में सुई-धागा थामकर आत्मनिर्भरता की राह चुनने वाली चबूतरा की ममता अब राजनीति में भी अपनी पहचान बना रही हैं। डिजाइनर सूट और स्वेटर सिलकर परिवार की आमदनी में योगदान देने वाली ममता ने बीडीसी की अनारक्षित सीट से चुनाव जीतकर महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम की है।
चुनाव में उनके सामने तीन पुरुष उम्मीदवार थे। ममता लंबे समय से सिलाई का काम कर रही हैं। उनके हाथों से तैयार डिजाइनर सूट और स्वेटर की क्षेत्र में पहचान बनी है। सिलाई से वह हर माह करीब आठ से दस हजार रुपये कमाती हैं। त्योहारी सीजन में काम और बढ़ जाता है।
सिलाई के साथ सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के दौरान लोगों से उनका जुड़ाव बढ़ा और क्षेत्र की समस्याओं को करीब से समझने का मौका मिला। इसी के चलते उन्होंने राजनीति में कदम रखने का फैसला लिया।
अनारक्षित सीट पर जीत हासिल कर उन्होंने साबित किया कि मेहनत और सामाजिक जुड़ाव के दम पर महिलाएं राजनीति में भी अपनी पहचान बना सकती हैं।ममता के पति चालक हैं और उनकी तीन बेटियां पढ़ाई कर रही हैं। नई राजनीतिक जिम्मेदारी संभालने के बावजूद वह आज भी सिलाई का काम जारी रखे हुए हैं।