संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। पारंपरिक फसलों से हटकर बागवानी की ओर बढ़ते किसानों के कदमों को लावारिस पशुओं का आतंक रोक रहा है। जिला में 28 गोसदन होने के बावजूद लावारिस पशुओं की तादाद कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।
वहीं, कृषि योग्य भूमि जंगल होती जा रही है। बीते पांच वर्षों में जिला में कृषि का उत्पादन काफी कम हुआ है। कम पैदावार की वजह खेती क्षेत्र कम होना है। सरकारी आंकड़ों के तहत बीते पांच सालों में कृषि भूमि में खासी कमी दर्ज हुई है।
जिले में पांच वर्ष पहले कुल 1,10,224 हेक्टेयर क्षेत्र में से 67,919 हेक्टेयर में खेती की जाती थी। वहीं, अब ताजा आंकड़े जुटाने के लिए कार्य किया जा रहा है। पांच वर्ष बाद जिले में महज लगभग 63 हजार हेक्टेयर भूमि से किसान पैदावार ले रहे हैं।
कृषि विभाग के आंकड़ों में वर्तमान में महज 33 हजार हेक्टेयर में खेती की जा रही है। हालांकि इसमें बागवानी के आंकड़े नहीं जोड़े गए हैं। जिला में सबसे अधिक समस्या भोरंज उपमंडल के जाहू, मुंडखर, भलवाणी, धमरोल, मैहरे, बड़सर, भोटा और सुजानपुर उपमंडल की पंचायतों में है।
पंचायतों से गांवों में किसानों ने खेती करना छोड़ दिया है। इससे यह उपजाऊ भूमि बंजर बन गई है। उपमंडल भोरंज के जाहू क्षेत्र में सीर और सुनैहल खड्ड के किनारे वर्षभर पानी रहने की वजह से लावारिस पशुओं के झुंड इनके किनारे घूमते रहते हैं।
इससे किसानों को खेती करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संतोषी कुमारी। संवाद- फोटो : भद्रवाह में झिंझोली पर्व की रस्म पूरी करते श्रद्धालु।
संतोषी कुमारी। संवाद- फोटो : भद्रवाह में झिंझोली पर्व की रस्म पूरी करते श्रद्धालु।
संतोषी कुमारी। संवाद- फोटो : भद्रवाह में झिंझोली पर्व की रस्म पूरी करते श्रद्धालु।
संतोषी कुमारी। संवाद- फोटो : भद्रवाह में झिंझोली पर्व की रस्म पूरी करते श्रद्धालु।