हमीरपुर। सुबह की सैर हो या बच्चों को स्कूल छोड़ना, अभिभावकों और बुजुर्गों की रोजमर्रा की दिनचर्या अब चुनौती बन गई है। शहर की गलियों में स्कूल जा रहे बच्चों के हाथों में पानी की बोतल से ज्यादा डंडे दिखाई देते हैं, जबकि बुजुर्ग सुबह-शाम की सैर पर निकलने से पहले चारों ओर नजर दौड़ाते हैं।
बाइक चालक भी सुनसान मोड़ों पर सतर्क हो जाते हैं, क्योंकि कब कुत्तों का झुंड पीछे पड़ जाए, इसका डर बना रहता है। हमीरपुर में लावारिस कुत्तों का आतंक अब लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
शहर हो या गांव, बाजार हो या मोहल्ला हर जगह लोगों में कुत्तों के हमले का डर बना रहता है। स्थिति ऐसी है कि लोग बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी कतराने लगे हैं।
पिछले तीन महीनों में जिलेभर में कुत्तों के काटने के 1857 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1247 मामले लावारिस कुत्तों के हैं, जबकि 610 लोग पालतू कुत्तों के हमले का शिकार हुए हैं। बीते सप्ताह भी दो स्कूली छात्रों पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया था। वहीं, भोटा में खेतों में खेल रहे एक बच्चे और हमीरपुर शहर में एक प्रवासी बच्ची को कुत्तों ने घायल कर दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनवरी 2026 में 445, फरवरी में 420 और मार्च में 382 डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए। वहीं, पालतू कुत्तों के काटने के मामले भी बढ़े हैं। इनमें जनवरी में 164, फरवरी में 212 और मार्च में 234 मामले दर्ज किए गए।
कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाली थी दो साल की बच्ची
25 नवंबर 2025 को हमीरपुर शहर के वार्ड नंबर आठ में लावारिस कुत्तों ने दो साल की बच्ची को नोच-नोच कर मार डाला था। इस घटना ने जिला के साथ प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। बच्ची की पहचान किरण (02) पुत्री लखन निवासी गांव भगत नगर, होशियारपुर (पंजाब) के रूप में हुई थी, जो कि माता-पिता के साथ वार्ड नंबर आठ नया नगर हमीरपुर में रहती थी।
एक वर्ष पहले हुई कुत्तों की गणना
एक वर्ष पहले हुई गणना के मुताबिक जिले में लावारिस कुत्तों की संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। हमीरपुर क्षेत्र में 1450, नादौन में 2330, सुजानपुर में 560 और बड़सर में करीब 2293 लावारिस कुत्ते दर्ज किए गए थे। अब स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि इनकी संख्या इससे कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है।
अस्पतालों में यह है व्यवस्था
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में रेबीज वैक्सीन के करीब 100 इंजेक्शन उपलब्ध हैं। वहीं, बड़सर स्वास्थ्य खंड में 879 और सुजानपुर स्वास्थ्य खंड में करीब 500 वैक्सीन उपलब्ध बताई गई हैं। रोजाना दो से तीन डॉग बाइट के मामले अस्पताल पहुंच रहे हैं।
सुबह के समय गलियों से निकलना मुश्किल हो जाता है। बुजुर्ग और बच्चों को अधिक परेशानी होती है। इन कुत्तों का कोई भरोसा नहीं होता कि कब पीछे से हमला कर दें। अब न्यायालय ने भी निर्देश दिए हैं। इस समस्या का समाधान होना चाहिए।
-नेलसन कुमार, निवासी हमीरपुर
ग्रामीण क्षेत्र में लावारिस कुत्तों का आतंक अधिक है। ग्रामीण स्तर पर लावारिस कुत्तों के आतंक से राहत दिलाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में लावारिस कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है।
-अशोक कुमार, निवासी डिडवीं
सड़क पर लावारिस कुत्ते आतंक का दूसरा नाम हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को अकेला देखकर ये हमला कर देते हैं। अकेले चलना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को इनसे राहत दिलाने के लिए धरातल पर उचित कदम उठाने चाहिएं।
-अजय कुमार, निवासी भोरंज
गांव हो या शहर चारों ओर लावारिस कुत्तों का आतंक देखने को मिल रहा है। वाहन चालकों पर भी यह कुत्ते हमला कर देते हैं। गांव में भी लावारिस कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह बेहद चिंताजनक है।
-अजय कुमार, बिझड़ी
लावारिस कुत्तों के काटने पर लोग मुआवजे के लिए न्यायालय में अर्जी दे सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बाद निकाय के अधिकारियों को लावारिस कुत्तों से राहत दिलाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिएं।
-आशीष शर्मा, अधिवक्ता, जिला न्यायालय हमीरपुर
कुत्ते के काटने पर क्या करें
घाव को कम से कम 15 मिनट तक बहते पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं।
बेटाडीन, डिटॉल या कोई एंटीसेप्टिक दवा लगाएं।
घाव को खुला रखें या हल्की साफ पट्टी करें।
सरकारी अस्पताल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाएं।
क्या न करें
मिर्च, तेल, हल्दी, मिट्टी या घरेलू लेप न लगाएं।
झाड़-फूंक या देसी इलाज पर भरोसा न करें।
इलाज में किसी प्रकार की देरी न करें।
अजय कुमार निवासी बिझड़ी
अजय कुमार निवासी बिझड़ी
अजय कुमार निवासी बिझड़ी
अजय कुमार निवासी बिझड़ी
अजय कुमार निवासी बिझड़ी
अजय कुमार निवासी बिझड़ी