जिला के किसान बंदरों के आतंक के चलते मक्की की बिजाई से तौबा करने लगे हैं। मक्की की जगह किसान चरी और बाजरे को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। इसके चलते कृषि विभाग के बीज केंद्रों में भी चरी और बाजरा के बीज की बिक्री मक्की से अधिक हो रही है।
कृषि विभाग का तर्क है कि बंदर मक्की की फसल को हर साल तबाह कर रहे हैं। किसानों को बोए बीज भी फसल पकने के बाद नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते किसान खेतों में चरी और बाजरा बीज रहे हैं।
हमीरपुर में 33 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की बिजाई होती है, लेकिन बंदरों के आतंक के चलते लोग मक्की की बिजाई से तौबा करने लगे हैं। अब तकरीबन 20 से 22 हेक्टेयर भूमि पर ही किसान मक्की बीज रहे हैं।
बीते वर्ष 1560 क्विंटल मक्की की फसल की बिजाई हुई थी, लेकिन इस साल अब तक 650 क्विंटल मक्की का बीज भी नहीं बिक पाया है। वहीं, चरी और बाजरा के बीज की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है।
बीते साल चरी का 1200 क्विंटल बीज बिका था, जबकि इस साल 1500 क्विंटल चरी की बीज बिक चुका है। इसके अलावा वर्ष 2015 में 300 क्विंटल बाजरा किसानों ने बीजा था, जबकि इस साल 700 क्विंटल बाजरा का बीज बिक चुका है।
किसान करतार चंद, देशराज, वेद प्रकाश, अमर सिंह की मानें तो मक्की के बीज बोने के बराबर भी बंदर फसल नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे में मक्की की बिजाई न करना ही बेहतर है।
हमीरपुर में 33 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की बिजाई होती है, लेकिन बंदरों के आतंक के चलते लोग मक्की की कम बिजाई कर रहे हैं।
- अलबेल सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग, हमीरपुर
कृषि विभाग के बीज विक्रय केंद्र में अब तक 1200 क्विंटल चरी और 700 क्विंटल बाजरा का बीज बिक चुका है। प्रत्येक विक्रय केंद्र पर दो से तीन क्विंटल अतिरिक्त चरी और बाजरा का बीज आ गया है।
- मनोज कुमार, इंजार्च, कृषि बीज केंद्र, हमीरपुर