जिला के 10 निजी स्कूलों को पर्यावरण एक्टिविटी के लिए मिलने वाली ग्रांट बंद होगी। समय पर आवेदन न करने की वजह से इन स्कूलों की ग्रांट अब शिक्षा विभाग बंद करवाएगा। स्कूलों को हर साल विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिरक्षण 2500 रुपये की ग्रांट जारी करता है। इन रुपयों को स्कूल में होने वाले पर्यावरण संबंधी कार्यक्रमों पर खर्च किया जाता है। इसमें प्लांटेशन सहित अन्य पर्यावरण संबंधी कार्य शामिल किए गए हैं।
विभाग ने जिला के सभी स्कूलों से मार्च 31 तक आवेदन मांगे थे। 15 स्कूल किन्हीं कारणों से अपने आवेदन जमा नहीं करवा पाए थे। इसके चलते स्कूलों को एक माह का अतिरिक्त समय दिया गया था। अतिरिक्त समय में महज पांच ही स्कूल आवेदन कर पाए।
10 स्कूलों ने आवेदन करना जरूरी नहीं समझा। विभागीय आदेशों की अवहेलना अब इन स्कूलों को मंहगी पड़ सकती है। हर वर्ष स्कूलों को मिलने वाली ग्रांट अब हमेशा के लिए बंद हो सकती है। आदेशों की अवहेलना करना पर शिक्षा विभाग ने इनकी ग्रांट बंद करने की सिफारिश भेजने का मन बनाया है। जल्द ही विभाग इनके नामों सहित ग्रांट बंद करने की सिफारिश विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिरक्षण विभाग से करेगा।
10 निजी स्कूलों की हर साल मिलने वाली ग्रांट को बंद करने की सिफारिश भेजी जाएगी। स्कूलों ने समय पर राशि के लिए आवेदन नहीं किया था। नोटिस भेजे जाने के बाद भी इन्होंने आवेदन नहीं किया।
- अश्वनी चंबयाल, जिला विज्ञान पर्यवेक्षक