पशुपालकों के पशुओं का घर द्वार पर निशुल्क होना था उपचार
प्रदेश सरकार ने जिला हमीरपुर के लिए चार एंबुलेंस की गई थी संचालित
बाद में कर्मचारियों को वापस बुलाकर रोकीं, कर्मचारियों ने लगाए अपने चहेतों को रखने के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सुजानपुर(हमीरपुर)। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह जिले में पशुपालन विभाग की एंबुलेंस का संचालन नहीं किया जा रहा है। पांच मार्च को मुख्यमंत्री ने हर विधानसभा क्षेत्र के लिए वैन एंबुलेंस चलाने के लिए हरी झंडी है। उनके गृह जिला में हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर बड़सर, नादौन, सुजानपुर और भोरंज में भी एंबुलेंस को रवाना किया गया। बाद में तैनात स्टाफ को वापस बुला लिया गया। ऐसे में अब नवनियुक्त कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा कर नेताओं के चहेतों को रखा जाएगा। इस प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने की कवायद चली हुई है। वहीं, पहले चयनित कर्मचारियों का कहना है कि शीघ्र गाड़ी न चलाई और उनके परिवार के सदस्य को हटाया तो मजबूर होकर घरद्वार पर जाकर पोल खोलेंगे। यह योजना आचार संहिता से पूर्व ही चालू हो गई थी। मुख्यमंत्री ने बाकायदा शिमला में इस योजना को हरी झंडी दी।
ऐसे में यहां पर इसे रोकना समझ से परे है। जबकि प्रदेशभर में यह एंबुलेंस चल रही हैं। प्रदेश में करीब 44 वेटरनरी वैन एंबुलेंस को शुरू किया गया है। 1962 नंबर डायल करने पर ये वेटरनरी वैन पशुओं का उपचार घरद्वार पर जाकर फ्री करेंगी। प्रदेश सरकार की ओर से इसका ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया है। जिला हमीरपुर में भी 14 मार्च को कंपनी की ओर से नवनियुक्त कर्मचारियों को विभाग ने बुलाकर जिला हमीरपुर के गांव ताल में गाड़ियों को सौंप दिया था। गाड़ियां स्टार्ट होकर अपने गंतव्य की ओर निकाल गईं। उसी दौरान उन्हें वापस बुलाकर खड़ा करवा दिया गया। गाड़ियों में पायलट, फार्मासिस्ट और डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं। इस संबंध में पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. अजय ने कहा कि सोमवार को यह एंबुलेंस दोबारा चल पड़ेंगी। कर्मचारियों को लेकर कंपनी में कुछ बात हुई होगी।