संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। गसोता महादेव को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने की मुहिम पर बजट की कमी हावी हो गई है। बीते डेढ़ से दो वर्ष से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में ही है।
पर्यटन विभाग की ओर इस प्रोजेक्ट के लिए बजट उपलब्ध करवाया गया था। पर्यटन के अलावा प्रशासन ने विभिन्न विभागों के माध्यम से भी बजट एकत्र किया था, लेकिन योजना सिरे नहीं चढ़ सकी है।
महाशिवरात्रि पर्व पर इस प्रोजेक्ट के तहत बने स्वीमिंग पुल में पहली दफा पानी डाला गया। हालांकि शिवरात्रि पर पवित्र स्नान की सुविधा तो दी गई, लेकिन जो दावे सरकार की ओर से इस धर्मस्थल को विकसित करने के लिए किए गए थे, वह सिरे नहीं चढ़ पाए हैं। यहां पर धार्मिक पयर्टन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए निर्माण गतिविधियों के एसडीएम हमीरपुर की अगुआई में कमेटी का गठन किया गया था।
इस कमेटी की निगरानी में तमाम कार्य हुआ है। अब लोक निर्माण विभाग की ओर से बचे हुए कार्य को पूरा करने के लिए तीन करोड़ 33 लाख रुपये का नया एस्टीमेट भेजा गया है। अभी तक इस प्रोजेक्ट के तहत स्वीमिंग पुल का निर्माण हुआ है।
कमेटी की ओर से लोक निर्माण विभाग को इस कार्य के लिए एक करोड़ 53 लाख का बजट उपलब्ध करवाया गया था। इस बजट में से स्वीमिंग पुल का ढांचा बनाने के लिए ही एक करोड़ 24 लाख रुपचे खर्च हो चुके हैं। इसके अलावा फिल्टेशन के लिए 32 लाख रुपये का बजट उपलब्ध करवाया गया था।
इस प्रोजेक्ट के तहत अभी शावर रूम, चाहरदिवारी, जमीन को समतल करने और अन्य कई महत्वपूर्ण कार्य बचे हुए हैं। ऐसे में लोक निर्माण विभाग की ओर से सवा तीन करोड़ की प्राक्कलन एसडीएम हमीरपुर को सौंपा गया है।
हालांकि पर्यटन विभाग की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में गसोता महादेव में धार्मिक पयर्टन को पंख लगने से मुहिम सिरे नहीं चढ़ पा रही है।
गसोती खड्ड किनारे निर्मित स्वीमिंग पुल। संवाद।