हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में सीटी स्कैन मशीन खराब होने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मशीन तीन दिन से खराब पड़ी है। इससे यहां जांच करवाने आने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
अस्पताल में स्थापित मशीन पुरानी होने के कारण आए दिन यह खराब हो जाती है। इसकी मरम्मत पर ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन लाखों रुपये खर्च चुका है लेकिन, समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। वहीं, अस्पताल में नई सीटी स्कैन मशीन खरीदने की योजना भी अभी सिरे नहीं चढ़ी है। अस्पताल की अपनी सीटी स्कैन मशीन खराब होने के कारण मरीजों को बाहरी लैबों में अधिक दाम देकर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। इससे उनपर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आपातकाल में मरीज बाहरी लैबों में मुंह मांगे दाम देने को मजबूर हैं।
अस्पताल की अपनी मशीन खराब होने के कारण लोगों को बाहरी लैबों में 800 रुपये के टेस्ट के लिए 1000 या 1200 रुपये, चार सौ रुपये के टेस्ट के लिए 600 से आठ सौ रुपये देने पड़ रहे हैं। कई टेस्टों के लिए बाहरी और मेडिकल कॉलेज के दामों में करीब दो गुना ही फर्क है। लोगों में अरुण कुमार, संजीव सेठी, चंदन कुमार, विवेक राणा आदि ने कहा कि यदि आपातकाल में ही सीटी स्कैन करवाना हो तो अस्पताल की अपनी मशीन खराब है। रात के समय बाहरी लैबों में सीटी स्कैन करवाने के 500 रुपये अतिरिक्त लेते हैं। ऐसे में गरीब आदमी को आर्थिक नुकसान होता है। इन्होंने कॉलेज प्रबंधन से मशीन को ठीक करवाने या नई मशीन स्थापित करने की मांग की है। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके अग्निहोत्री ने कहा कि मशीन तीन दिन से खराब है। पुरानी मशीन होने के कारण बार-बार यह समस्या पेश आती है। इस समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। नई मशीन के बारे में निदेशालय में बात की जाएगी।
मेडिकल कॉलेज की सीटी स्कैन मरीज खराब, बैरंग लौट रहे मरीज
तीन दिन से बाहरी लैबों में जांच करवाने को मजबूर है अस्पताल आने वाले मरीज
अस्पताल की मशीन पुरानी होने के कारण आए माह पेश आती है परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। डा. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में सीटी स्कैन मशीन तीन दिन से खराब पड़ी है। इस कारण यहां जांच करवाने आने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। अस्पताल में स्थापित मशीन पुरानी होने के कारण आए माह यह खराब हो जाती है। इसकी मरम्मत पर ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन लाखों रुपये खर्च चुका है, लेकिन समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो रहा है। वहीं अस्पताल में नई सीटी स्कैन मशीन खरीदने की योजना भी अभी सिरे नहीं चढ़ी है। अस्पताल की अपनी सीटी स्कैन मशीन खराब होने के कारण यहां कम दामों पर होने वाली जांच बाहरी लैबों में अधिक दाम पर हो रही है। आपातकाल में मरीज बाहरी लैबों में मुंह मांगे दाम देने को मजबूर हैं।
अस्पताल की अपनी मशीन खराब होने के कारण लोगों को बाहरी लैबों में 800 रुपये के टेस्ट के लिए 1000 या 1200 रुपये, चार सौ रुपये के टेस्ट के लिए 600 से आठ सौ रुपये देने पड़ रहे है। कई टेस्टों के लिए बाहरी और मेडिकल कॉलेज के दामों में करीब दो गुना ही फर्क है। लोगों में अरूण कुमार, संजीव सेठी, चंदन कुमार, विवेक राणा आदि ने कहा कि यदि आपातकाल में ही सीटी स्कैन करवाना हो तो अस्पताल की अपनी मशीन खराब है। रात के समय बाहरी लैबों में सीटी स्कैन करवाने के 500 रुपये अतिरिक्त लेते हैं। ऐसे में गरीब आदमी को आर्थिक नुकसान होता है। इन्होंने कॉलेज प्रबंधन से मशीन को ठीक करवाने या नई मशीन स्थापित करने की मांग की है। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डा. आरके अग्रिहोत्री ने कहा कि मशीन तीन दिन से खराब है। पुरानी मशीन होने के कारण बार-बार यह समस्या पेश आती है। इस समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। नई मशीन बारे निदेशालय में बात की जाएगी।