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Smart Meter: कोर्ट ने कहा- स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार पर बिजली काटना गलत, आपूर्ति बहाल करने के दिए आदेश

Sun, 05 Jul 2026 11:04 PM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर

सार

सिविल कोर्ट ने स्मार्ट मीटर को स्वैच्छिक माना है। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड को जैमल सिंह की बिजली 10 दिन में पुराने मीटर से बहाल करने का आदेश दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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स्मार्ट मीटर को लेकर हमीरपुर की सिविल कोर्ट ने एक अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट नंबर-3 की सिविल जज टीना मल्होत्रा ने लंबलू के एक दुकानदार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड को 10 दिन के भीतर पुराने मीटर के माध्यम से बिजली आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया स्वैच्छिक (वॉलंटरी) है और उपभोक्ता पर इसे जबरन नहीं थोपा जा सकता। 

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मामला लंबलू निवासी जैमल सिंह की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया था कि बिजली बोर्ड ने स्मार्ट मीटर लगाने के लिए नोटिस जारी किया था और इनकार करने पर बिजली आपूर्ति काटने की चेतावनी दी थी। बाद में मामला अदालत में विचाराधीन रहने के दौरान बिजली कनेक्शन भी काट दिया गया।

सुनवाई के दौरान बिजली बोर्ड की ओर से दलील दी गई कि राज्य सरकार की नीति और बिजली अधिनियम की धारा-55 के तहत सही (करेक्ट) मीटर के माध्यम से ही बिजली आपूर्ति दी जा सकती है तथा स्मार्ट मीटर इसी नीति का हिस्सा हैं। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक है और बिजली काटना कानून के विपरीत है। 
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध रिकॉर्ड और सरकारी स्पष्टीकरणों से यह प्रतीत होता है कि स्मार्ट मीटर लगाने की योजना स्वैच्छिक है। 

अदालत ने एचपीएसईबीएल को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की दुकान की बिजली आपूर्ति 10 दिन के भीतर पूर्ववत बहाल की जाए। यह व्यवस्था मुख्य वाद के अंतिम निर्णय तक प्रभावी रहेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल अंतरिम आवेदन के निस्तारण के उद्देश्य से हैं और इन्हें मुख्य वाद के अंतिम निर्णय पर राय नहीं माना जाएगा। मुख्य मामले की सुनवाई अलग से जारी रहेगी।

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