ताल स्टेडियम बिझड़ी में दुकानदारों के कोरोना सैंपल लेती स्वास्थ्य विभाग की टीम।
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हमीरपुर। बेशक प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले में कोरोना जांच के लिए सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं लेकिन, डॉ. राधा कृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में इन निर्देशों का सही पालन नहीं हो रहा। यहां पर मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला बुधवार को सामने आया है।
जिला मंडी के सरकाघाट उपमंडल के तहत आते गांव डली डाकघर दारवा की रहने वाली 35 वर्षीय मरीज अपने तीन अन्य रिश्तेदारों के साथ रेफर होकर सोमवार को हमीरपुर मेडिकल कॉलेज पहुंची थी। हमीरपुर अस्पताल में तीन दिन तक भर्ती रहने के बाद बुधवार को महिला मरीज का रैपिड एंटीजन टेस्ट करवाया तो उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिस वार्ड में यह महिला भर्ती थी, वहां पर करीब दो दर्जन अन्य महिला मरीज भी भर्ती हैं।
रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही महिला को कोविड-19 केयर सेंटर शिफ्ट कर दिया। महिला के साथ रह रहे पति और दो अन्य लोगों ने अस्पताल प्रशासन से उनकी भी कोरोना जांच करवाने का आग्रह किया लेकिन, उन्हें बिना टेस्ट के ही घर भेज दिया। अस्पताल से बाहर आने के बाद तीनों लोग गांधी चौक पर घूमते रहे। जिससे लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। सरकाघाट निवासी कृष्ण कुमार ने कहा कि वह सरकाघाट अस्पताल से एंबुलेंस में अपनी मौसी के साथ हमीरपुर पहुंचे थे। एंबुलेंस में मौसी के अलावा तीन अन्य लोग थे। मौसी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने पर बुधवार शाम को उन्हें कोविड-19 केयर सेंटर शिफ्ट कर दिया। कृष्ण कुमार ने बताया कि चिकित्सकों से आग्रह के बावजूद उनका सैंपल नहीं लिया गया। घर जाने में डर लग रहा है, ताकि परिवार में कोई अन्य वायरस की चपेट में न आए। इधर, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के एसएमओ डॉ. आरके अग्निहोत्री ने बार-बार फोन के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया।
उधर, उपायुक्त हमीरपुर देवश्वेता बनिक ने कहा कि कोरोना संक्रमित महिला के संपर्क में आए तीन अन्य तीमारदारों के कोरोना सैंपल लेने के बारे में अस्पताल प्रशासन को निर्देश दे दिए हैं। इस मामले में जांच के बाद उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।