अवाहदेवी (हमीरपुर)। अवाहदेवी कस्बे की रहने वाली निशा ठाकुर की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं। निशा ने अपने बचपन के शौक को जीवन का आधार बनाया और उसी से न केवल आत्मनिर्भर बनीं, बल्कि पूरे परिवार को मजबूत सहारा भी दिया।
बचपन में जब निशा स्कूल में पढ़ती थीं, तब वह अकसर अपनी माता को सिलाई-कढ़ाई करते हुए देखा करती थीं। उनकी माता 90 के दशक में अवाहदेवी में ही सिलाई-कढ़ाई की दुकान चलाती थीं। मां के हुनर और मेहनत ने निशा के मन में भी इस कला के प्रति गहरा लगाव पैदा कर दिया। यहीं से उनके जीवन की दिशा तय हो गई।
मां से मिली प्रेरणा के चलते निशा ने 1989 में आईटीआई की पढ़ाई पूरी की और 1991 में सीटीआई का प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान उनका विवाह धर्मपुर के मासला गांव के शिव कुमार वर्मा से हो गया, लेकिन शादी के बाद भी उनके सपनों की उड़ान नहीं रुकी। उनके पति शिव कुमार ने हर कदम पर उनका साथ दिया और उनके हुनर को आगे बढ़ाने के लिए पूरा प्रोत्साहन दिया।
निशा ने 1994 से 2001 तक ब्लॉक स्तर पर गांव की युवतियों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देना शुरू किया। उन्होंने सैकड़ों लड़कियों को आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। आज निशा केवल एक कुशल प्रशिक्षक ही नहीं, बल्कि एक सशक्त महिला की मिसाल हैं। संवाद