हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सरकारी वेबसाइट ही लोगों का शोषण कर रही है। वैसे तो इस आयोग का गठन बच्चों पर होने वाले अत्याचार और बाल शोषण से मुक्ति दिलाने के मकसद से किया गया लेकिन, सरकार की ओर से मनोनीत आयोग की अध्यक्ष और आयोग के अन्य सभी सदस्य वेबसाइट में दी गई गलत सूचना से प्रताड़ित हो रहे हैं। यही नहीं पूर्व में इस आयोग की अध्यक्ष और आधा दर्जन अन्य सदस्य भी पदमुक्त होने के बावजूद प्रदेश भर से बाल शोषण से संबंधित आने वाली फोन कॉल को सुन-सुनकर परेशान हैं।
प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की वेबसाइट अभी तक शिमला के कोटखाई निवासी किरण धांटा को चेयरमैन तथा राजेंद्र मोहन समेत अन्य छह लोगों को आयोग का सदस्य बता रही है। जबकि इन सभी को अपना पद छोड़े हुए लंबा समय बीत चुका है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सत्ता संभालने के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधीन आने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग के बाल अधिकार संरक्षण आयोग में चेयरमैन के पद पर हमीरपुर निवासी बंदना शर्मा योगी की ताजपोशी की है। इसके साथ ही आयोग के अन्य सदस्य भी नियुक्त किए गए हैं लेकिन, सरकारी तंत्र को दुरुस्त करने के दावे करने वाली भाजपा सरकार अपने ढाई साल के कार्यकाल में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की एक वेबसाइट में दी जानकारी को संशोधित नहीं कर पाई है। जिस कारण चेयरमैन समेत सदस्यों को बाल शोषण की शिकायतें सही तरीके से प्राप्त नहीं हो पा रही। वहीं, कुछ लोग पूर्व चेयरमैन किरण धांटा समेत पूर्व में आयोग में रहे सदस्यों को ही फोन और ईमेल से बाल शोषण की शिकायतें भेज रहे हैं। लोग आरोप लगा रहे हैं कि उनकी शिकायतों का सही समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा।
उधर, हिमाचल प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरमैन बंदना शर्मा योगी ने माना कि वेबसाइट पर अभी तक पूर्व पदाधिकारियों के नाम, उनके मोबाइल नंबर हैं, जिन्हें विभाग ने अभी तक नहीं हटाया। इस बारे में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से बात की गई है, शीघ्र सूचना संशोधित होगी।