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Hamirpur (Himachal) News: कागजों में दौड़ रहे अभियान, सड़कों पर खतरा बने लावारिस कुत्ते

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हमीरपुर। लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक और आए दिन सामने आ रही घटनाओं के बावजूद नगर निकायों में नसबंदी और वैक्सीनेशन योजना सिर्फ सरकारी औपचारिकता बनकर रह गई है। नसंबदी के अभियान महज कागजों में दौड़ रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि न नगर निकायों के पास न संसाधन हैं, न बजट और न ही पर्याप्त स्टाफ। ऐसे में कुत्तों की नसबंदी का अभियान फाइलों और बैठकों से आगे नहीं बढ़ पा रहा। स्थिति यह है कि किसी घटना के बाद कुछ दिनों तक अभियान का शोर मचता है, अधिकारी सक्रिय नजर आते हैं, लेकिन कुछ समय बाद पूरा मामला फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। नतीजा यह है कि शहरों और कस्बों में लावारिस कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं। उपमंडल हमीरपुर में करीब 1450 लावारिस कुत्ते हैं। इनमें से लगभग 600 कुत्ते नगर निगम क्षेत्र में हैं। दावा किया जा रहा है कि करीब 500 कुत्तों का वैक्सीनेशन किया गया है, लेकिन नसबंदी के नाम पर केवल 50 कुत्तों तक ही अभियान सिमट गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम क्षेत्र में अब तक सिर्फ 15 लोगों ने ही अपने पालतू कुत्तों का पंजीकरण करवाया है। इससे साफ है कि नियम लागू करवाने में भी प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।
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सुजानपुर उपमंडल में करीब 560 लावारिस कुत्ते हैं। नगर परिषद सुजानपुर के तहत लगभग 65 कुत्तों में से केवल 53 का ही वैक्सीनेशन हो पाया है। वहीं नगर पंचायत भोटा में हालात और भी बदतर हैं। यहां आज तक वैक्सीनेशन अभियान शुरू तक नहीं हो पाया। पूर्व नगर पंचायत में पूरी कवायद केवल अधिकारियों को पत्र लिखने और फाइलें आगे बढ़ाने तक सीमित रही। यही हालात नगर परिषद नादौन के भी हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नगर निकाय और पशुपालन विभाग आज तक लावारिस कुत्तों के लिए एक स्थायी आश्रय स्थल तक नहीं बना पाए। नतीजतन सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में लावारिस कुत्तों का खतरा लगातार बढ़ रहा है और लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं।

नगर निगम हमीरपुर के आयुक्त से सीधे सवाल
प्रश्न : नगर निकाय में नसबंदी को लेकर कदम क्यों नहीं उठाए गए हैं।

उत्तर : कुत्तों की नसबंदी के बाद कुत्तों को चार दिन के लिए रखना पड़ता है, लेकिन ढांचागत व्यवस्था न होने के कारण दिक्कतें पेश आ रही हैं।
प्रश्न : लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए समर्पित स्टाफ की क्या व्यवस्था है।
उत्तर : कुत्तों को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता होती है, लेकिन यहां पर प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है।
प्रश्न : आज तक लावारिस कुत्तों की नसबंदी के लिए आश्रलाय बनाने को लेकर क्या कोई योजना बनाई गई है।
उत्तर : पशुपालन विभाग को पत्र लिखा गया है। इस संबंध में अधिकारियों से संपर्क हुआ है। शीघ्र योजना तैयार की जा रही है ताकि जिले के लावारिस कुत्तों को एक स्थान पर आश्रय मिल सके।
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प्रश्न : सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को किस तरह अमलीजामा पहनाएंगे।
उत्तर : यह हमारे लिए चुनौती है। हालांकि, शहर में शैक्षणिक सहित अन्य संस्थानों के मुखियाओं से आग्रह है कि निगम को जानकारी दें कि उनके आसपास लावारिस कुत्ते हैं। इसके बाद इनकी पशुपालन विभाग के अधिकारी जांच करेंगे कि ये कुत्ते रेबीज संक्रमित हैं या नहीं। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
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