हमीरपुर। सरकार ने प्रदेश की सीमाएं आवाजाही के लिए खोल दी हैं। इससे हिमाचल में निजी वाहनों से प्रवेश करने वालों की संख्या काफी बढ़ी है लेकिन, बसों में यात्रा करने से लोग परहेज कर रहे हैं। अधिकतर लोग निजी वाहनों या वाहन किराये पर लेकर अपने घर लौट रहे हैं। जिला हमीरपुर में निजी बस ऑपरेटरों ने 350 में से महज 60 रूटों पर बसें दौड़ाई हैं पर, इन्हें सवारियां नहीं मिल रही हैं। इन आपरेटरों को घाटे में ही अपनी बसें रूटों पर चलानी पड़ रही हैं। बॉर्डर खुलने के बाद जिले से सीमावर्ती क्षेत्रों जिला ऊना, कांगड़ा, सोलन के बद्दी आदि को जाने वाली बसों में भी नाममात्र ही सवारियां हैं। कोरोना संकटकाल में लोग बसों में सफर नहीं कर रहे हैं। लोकल रूटों पर कुछेक बसों में ही सवारियां दिख रही हैं। निजी बस ऑपरेटर यूनियन हमीरपुर के उपाध्यक्ष विजय ठाकुर ने कहा कि बसों में सवारियां नहीं हैं। बॉर्डर खुलने के बाद भी लोग निजी वाहनों में ही आ रहे हैं। वे बसें खाली दौड़ाने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से टैक्स मार्च 2021 तक माफ करने के साथ कैपिटल अमाउंट दो लाख हर साल ऑपरेटरों को जारी करने की मांग की है।
कोट
ऑपरेटर सवारियां न होने की कर रहे शिकायतें : वीरेंद्र
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि वर्तमान में 60 के करीब निजी बसें जिले में चल रही हैं। ऑपरेटर सवारियां न होने की लगातार शिकायतें कर रहे हैं। जिले में 350 के करीब निजी बसें हैं।