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फर्जी वोट डालने पर नादौन अध्यापक संघ के चुनाव रद्द 16-24-56

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हमीरपुर। बहुचर्चित फर्जी वोट डालने के मामले में राज्य चुनाव आयोग ने नादौन ब्लॉक राजकीय अध्यापक संघ के चुनाव रद्द कर दिए गए हैं। ब्लॉक कार्यकारिणी के चुनाव में कई अनियमितताएं पाई गईं हैं। अब ब्लॉक इकाई के नए सिरे से चुनाव होंगे। 16 जून 2019 को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कांगू में नादौन ब्लॉक के त्रैवार्षिक चुनाव 2019-22 संपन्न हुए थे। जिसमें मनोज शर्मा को विजयी घोषित किया गया। जबकि, रितेश शर्मा चुनाव हार गए। इस चुनाव में धांधली के आरोप लगाते हुए रितेश शर्मा ने इस मामले की शिकायत राज्य चुनाव आयोग से की थी।
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शिकायत के बाद इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राज्य चुनाव आयुक्त दलेर सिंह जंवाल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। कमेटी ने 21 जून को इस मामले की जांच की और जांच रिपोर्ट राज्य चुनाव आयोग को सौंपी। रिपोर्ट में अनियमितताओं को ध्यान में रखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त अरुण सिंह गुलेरिया, राज्य चुनाव आयुक्त दलेर सिंह जंवाल और नरवीर सिंह चंदेल ने नादौन ब्लॉक राजकीय अध्यापक संघ के चुनाव को रद्द कर दिया है। आयोग ने इस मामले की सारी रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव नरेश महाजन को सौंप दी है। इसके साथ ही आयोग ने हमीरपुर जिला निर्वाचन अधिकारी कैलाश ठाकुर और नादौन ब्लॉक के निर्वाचन अधिकारी विपिन पटियाल को अब नादौन ब्लॉक के नए सिरे से चुनाव करवाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी को चुनाव के संदर्भ में नई तारीख, स्थान निर्धारित करने के अलावा ब्लॉक निर्वाचन अधिकारी, सहायक ब्लॉक निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति करने के भी निर्देश दिए हैं। आयोग ने 16 जून को चुनाव जीते मनोज शर्मा को चुनाव के बाद हासिल किए कार्यवाही रजिस्टर और चुनाव रिकॉर्ड को जिला निर्वाचन अधिकारी के पास जमा करवाने के निर्देश दिए हैं। उधर, राज्य चुनाव आयुक्त दलेर सिंह जंवाल ने कहा कि नादौन ब्लॉक के चुनाव रद्द कर दिए गए हैं, अब दोबारा नए सिरे से चुनाव की तारीख का एलान होगा।
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जांच रिपोर्ट में यह आया सामने-
चुनाव आयोग की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। चार ऐसे मतदाताओं ने वोट डाले जो नादौन ब्लॉक से संबंध नहीं रखते हैं। चुनाव शिक्षक संघ के थे, लेकिन दो लैब अटेंडेंट ने भी वोट डाल दिए। तीन ऐसे वोटरों ने वोट डाला जिनका चुनाव रजिस्टर पर स्कूल के नाम और हस्ताक्षर नहीं पाए गए। एक ही स्कूल के एक ही नाम के दो लोगों ने वोट डाला, लेकिन जांच में संबंधित स्कूल में उस नाम का केवल एक ही अध्यापक निकला। एक अध्यापक ने दो विभिन्न सीरियल नंबर और दो विभिन्न हस्ताक्षर कर वोट डाला। चुनाव खत्म होने के बाद रजिस्टर पर 396 तक सीरियल नंबर थे, जबकि जांच में 414 निकले। यहां तक चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति भी जिला चुनाव अधिकारी के अधिसूचना के विपरीत निकली।
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