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Hamirpur (Himachal) News: भोरंज और बड़सर में लहलहाई काली हल्दी की फसल, दो हजार प्रतिकिलो मिल रहे दाम

Mon, 19 Oct 2026 01:15 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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बड़सर में उगाई गई काली हल्दी। संवाद।
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हमीरपुर। खेतों में लावारिस पशुओं की उजाड़ से परेशान किसानों के लिए काली हल्दी की खेती नई उम्मीद बनकर उभरी है। कम देखरेख में तैयार होने वाली इस फसल को पशुओं से नुकसान की चिंता भी अपेक्षाकृत कम रहती है।
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हिमाचल में इस खेती की पहल के बीच हमीरपुर जिले के भोरंज और बड़सर विकास खंडों में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बड़सर में काली हल्दी 2,000 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचने में सफलता मिली है, जबकि कच्ची हल्दी 400 रुपये प्रति किलो तक बिकी है।
अब दोनों विकास खंडों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं इस खेती को आगे बढ़ा रही हैं। बड़सर विकास खंड में वर्ष 2024 से काली हल्दी की खेती की जा रही है। यहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने शुरुआत में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर से बीज लेकर इसकी बिजाई की थी।
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पिछले साल तैयार हुई फसल को इस वर्ष बेहतर दाम पर बेचने में सफलता मिली है। करीब 80 किलोग्राम काली हल्दी 2,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकी, जिससे महिलाओं को कुल 1.60 लाख रुपये की आय हुई।
चार क्षेत्रों में बढ़ाया खेती का दायरा
काली हल्दी की बिक्री से मिले बेहतर परिणामों के बाद बड़सर क्षेत्र में इसकी खेती का दायरा बढ़ाया गया है। इस वर्ष महारल, सठवीं, समैला और कलवाल क्षेत्रों में भी काली हल्दी की बिजाई की गई है। इन क्षेत्रों में खेती का रकबा बढ़ाकर 80 कनाल किए जाने की जानकारी है। काली हल्दी की खेती से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आय का नया साधन मिला है। वहीं, लावारिस पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान से परेशान किसानों के लिए भी यह खेती एक वैकल्पिक संभावना के रूप में सामने आ रही है।

भोरंज में पश्चिम बंगाल से लाया बीज
भोरंज विकास खंड में वर्ष 2025 में काली हल्दी की खेती की शुरुआत हुई। यहां मुंडखर, बडैहर और जाहू की करीब 20 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इस खेती से जुड़ी हैं। महिलाओं ने पश्चिम बंगाल से बीज मंगवाकर करीब 20 कनाल भूमि में इसकी बिजाई की है। इस पहल को फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। फिलहाल यहां फसल की कटाई होनी बाकी है। बड़सर में काली हल्दी की बिक्री से मिले बेहतर दाम के बाद भोरंज में भी इस फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद है। इस बार बड़सर में भी भोरंज से पश्चिम बंगाल से लाया गया बीज लिया गया है।

औषधीय गुणों के कारण बाजार में मांग
काली हल्दी को उसके औषधीय गुणों के कारण खास माना जाता है। कम देखरेख में तैयार होने वाली इस फसल को लेकर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की दिलचस्पी बढ़ रही है। यदि आने वाले समय में भी बेहतर दाम मिलते हैं तो यह खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का एक अतिरिक्त साधन बन सकती है।

कोट
बड़सर में खेती का प्रयोग सफल रहा है। इस वर्ष भी फसल अच्छी है। पिछले साल तैयार हुई काली हल्दी को इस बार बेहतर दाम पर बेचा गया है। इससे महिलाओं का उत्साह बढ़ा है। -राजेश कुमार, खंड विकास अधिकारी, बिझड़ी

बड़सर में उगाई गई काली हल्दी। संवाद।

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