हमीरपुर। मोबाइल फोन का अत्याधिक इस्तेमाल बच्चों की बोलने की क्षमता को भी क्षीण कर रहा है। व्यस्तता के दौर में आजकल अधिकतर माता-पिता काम निपटाने के चक्कर में अपने बच्चों को मोबाइल फोन दे देते हैं, ताकि रोए न। वहीं, बच्चा भी मोबाइल फोन देखता रहता है। इसका प्रभाव उसके दिमाग और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
आयुष विभाग हमीरपुर में पंचकर्म विधि से ऐसे छोटे बच्चों का भी उपचार किया जा रहा है, जो जन्म के बाद कुछ समय तो बोले, लेकिन उसके बाद उन्होंने बोलना बंद कर दिया। इसके कारण छोटी आयु में बच्चों का मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना और बर्थ ट्रोमा, एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) आदि हैं। डेढ़ से ढाई वर्ष आयु के बच्चे इस तरह की बीमारी से ज्यादा ग्रसित हो रहे हैं।
बच्चों के लगातार मोबाइल में कार्टून आदि देखने से उनकी बोलने और सुनने की क्षमता क्षीण हो रही है। ऐसे करीब आठ बच्चों का आयुष अस्पताल हमीरपुर में पंचकर्म विधि से उपचार चल रहा है। वहीं चिकित्सक बच्चों को जंक फूड और मोबाइल आदि से दूर रखने की भी सलाह दे रहे हैं। आयुष अस्पताल हमीरपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिलीप सिंह ने कहा कि आयुष अस्पताल में पंचकर्म पद्धति से हर तरह के रोग का इलाज किया जाता है और इसके परिणाम बहुत ही अच्छे हैं।
बच्चे बोलने की तरफ नहीं दे रहे ध्यान
बच्चे आठ नौ माह होने के बाद मां, पापा, दादी जैसे शब्दों का उच्चारण करना शुरू कर देते हैं। मगर आज के दौर में व्यस्तता अधिक है। ऐसे में अभिभावक भी बच्चों को मोबाइल आदि लगाकर दे देते हैं और बच्चा उसमें ही लगा रहता है। बोलने की तरफ ध्यान नहीं दे रहा। मोबाइल की हानिकारक रेडिएशन उनके दिमाग को प्रभावित कर रही हैं। इससे उनके सुनने व बोलने की शक्ति क्षीण हो रही है।