अवाहदेवी (हमीरपुर)। बस अड्डा के अभाव से अवाहदेवी कस्बा जूझ रहा है। इसके चलते न केवल वाहन चालकों को, बल्कि आम लोगों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जाहू की तरह अवाहदेवी भी हमीरपुर और मंडी जिलों के बीच एक प्रमुख केंद्र है।
अवाहदेवी माता के प्राचीन मंदिर के नाम पर बसे इस कस्बे का पिछले चार दशकों में काफी विस्तार हुआ है। यातायात निरंतर बढ़ने के बावजूद बस अड्डे की व्यवस्था न होने से स्थिति विकट होती जा रही है। वर्तमान में वाहनों को मंदिर के मुख्य द्वार के पास ही पार्क किया जाता है।
यहां पर हर समय आठ से दस छोटे वाहन खड़े रहते हैं। वहीं, यहां पर केवल दो से तीन बसों के पार्क होने की जगह है। इससे क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या आम हो गई है। वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के निर्देश पर प्रशासन और एचआरटीसी अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने कस्बे में बस अड्डे के लिए स्थान का चयन किया था। यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी।
यहां पर भी कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर लिया। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने उसी स्थान को टैक्सी स्टैंड के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया। इसका शिलान्यास सांसद अनुराग ठाकुर ने 22 दिसंबर 2009 को किया था, मगर शिलान्यास के बाद यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। आज वहां न तो बसें रुकती हैं और न ही टैक्सियां।
अधिकारियों से की बस अड्डा निर्माण की मांग
ग्राम पंचायत बगवाड़ा के प्रधान देसराज चंदेल, उपप्रधान अनिल कटोच, मंदिर कमेटी के प्रधान रमेश चंद गुलेरिया और बाजार सुधार सभा के अध्यक्ष विनोद ठाकुर ने बताया कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष बस अड्डा निर्माण की मांग रखी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि अवाहदेवी में शीघ्र ही बस अड्डे का निर्माण किया जाए।
वहीं, एचआरटीसी हमीरपुर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक राहुल कुमार ने बताया कि अभी इस बारे में कोई भी प्रपोजल प्राप्त नहीं हुआ है।