हमीरपुर। संयुक्त मोर्चा ऑफ एक्स सर्विसमैन (जेसीओ एवं ओआर) ने वन रैंक वन पेंशन-2 (ओआरओपी-2) की विसंगतियों में सुधार करने के लिए फिर आवाज बुलंद की है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र सरकार पर अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं।
संयुक्त मोर्चा ऑफ एक्स सर्विसमैन (जेसीओ एवं ओआर) हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन जगदीश वर्मा, लेफ्टिनेंट रमेश कुमार तपवाल और सूबेदार मेजर रोशन लाल चौहान ने कहा कि जनवरी 2023 को केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर पूर्व सैनिकों की ओआरओपी-2 का पेंशन टेबल जारी किया था। इसमें कई वेतन विसंगतियां हैं, जिससे पूर्व सैनिकों में निराशा है।
उन्होंने कहा कि ओआरओपी की मांग 1973 से ही शुरू हो गई थी जब सरकार ने पूर्व सैनिकों की पेंशन को अंतिम वेतन के 70 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद 2015 में केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन की घोषणा की, जिसके लिए वह केंद्र सरकार के आभारी हैं, लेकिन ओआरओपी-2 से उत्पन्न हुई विसंगतियों को केंद्र सरकार लगातार अनदेखी कर रही है।
उन्होंने कहा कि देशभर के लगभग 28 लाख पूर्व सैनिकों जोकि कभी देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात रहे हैं, उन्हें संसद घेराव और रेल रोको आदि निर्णय लेने के लिए भी मजबूर होना पड़ा है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस देश की पूर्व सैनिक रक्षा किया करते थे और देशवासियों की सुरक्षा के लिए अपनी जान देने के लिए तैयार रहते थे, आज उन्हीं पूर्व सैनिकों की मांगों की अनदेखी हो रही है।