विधानसभा क्षेत्र बड़सर के मैहरे में प्रस्तावित बस अड्डे का निर्माण शिलान्यास के छह साल बाद भी नहीं हो पाया है। ढाई करोड़ की लागत से बनने वाले इस अड्डे का निर्माण फाइलों में ही बंद है। छह साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 15 अगस्त 2011 को बस अड्डे के निर्माण का शिलान्यास किया था। हालांकि, अब पूर्व भाजपा सरकार में बस स्टैंड के लिए चिन्हित जमीन कांग्रेसियों को कम दिख रही है और बस स्टैंड के लिए नई जमीन मिल भी नहीं रही।
सवाल उठना लाजमी है कि अगर जमीन कम थी तो एचआरटीसी ने शिलान्यास क्यों करवाया? कौन सच और कौन झूठ बोल रहा है, लोगों के जहन में यह सवाल बार-बार उठ रहे हैं। हालांकि शिलान्यास के बाद क्षेत्रवासियों में अड्डा बनने की उम्मीद जगी थी लेकिन समय के साथ-साथ यह उम्मीद अब टूटने लगी है। लोगों का कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही बस अड्डा बनाने के सपने दिखाए जाते हैं। ढाई करोड़ से बनने वाले बस अड्डे के निर्माण के लिए 12 कनाल भूमि संबंधित विभाग के नाम हो चुकी है।
इसके बावजूद बस अड्डे का निर्माण नहीं हुआ है। हालत यह है कि मैहरे में हर रोज वाहनों का जमघट लगा रहता है। मैहरे में निजी गाड़ियां और टैक्सियां खड़ी करने के लिए पार्किंग की सुविधा तक नहीं है। ऐसे में वाहनों का जमघट लगने से यातायात बाधित हो रहा है और बस चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने बस अड्डे के शीघ्र निर्माणकी मांग कई बार उठाई गई है।
अड्डे का निर्माण नहीं होने से लोग अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। एचआरटीसी के मंडलीय प्रबंधक दिलजीत सिंह का कहना है कि मैहरे में बस अड्डे का निर्माण प्रस्तावित है। जमीन विवाद के चलते अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है। बस स्टैंड के लिए भूमि की तलाश की जा रही है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा बस स्टैंड : लखनपाल
मुख्य संसदीय सचिव और बड़सर से स्थानीय विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार में जिस जगह पर बस अड्डे का शिलान्यास किया गया, वह जमीन बहुत ही कम है। अगर वहां बस अड्डा बना तो महज चार बसें ही खड़ी हो पातीं। जिला प्रशासन को नई जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। एक-डेढ़ माह में बस स्टैंड के लिए भूमि का चयन कर लिया जाएगा। मैहरे में आधुनिक सुविधाओं से लैस बस स्टैंड बनाया जाएगा।