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Hamirpur (Himachal) News: मंहगे शॉल बनाने वाली महिलाओं के कारीगर हाथों में चंद रुपये

Thu, 14 Nov 2024 02:25 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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कमलेश रतन भारद्वाज
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हमीरपुर। वस्त्र मंत्रालय के पोर्टल पर हिमाचल हथकरघा और बुनकर से जुड़ी हुई 19,213 महिलाएं पंजीकृत हैं। यह महिलाएं पोर्टल पर पंजीकृत तो हैं, लेकिन उद्यमी बनने की बजाय अधिकतर कामगार बनकर रह गई हैं।
हालात ऐसे हैं कि इन महिलाओं को बारीक कारीगरी का अच्छा मेहनताना तक नहीं मिल पा रहा है। जिन शॉल और अन्य हिमाचली परिधान को बाजार में हजारों रुपये की कीमत पर बेचा जा रहा है, उनको बनाने वाले महिला कारीगर के हाथों में चंद रुपये दिए जा रहे हैं। जागरूकता के अभाव में यह महिलाएं उद्यमी न बनकर एक मजदूर बन गई हैं। एनआईटी हमीरपुर के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित की राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत शोध पत्र में यह चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय लोक प्रशासन विभाग के पीएचडी के स्कॉलर बवीता शर्मा ने इस शोध पत्र को प्रस्तुत किया है। यह शोधपत्र इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) की ओर फंडिड प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। एचपीयू के लोक प्रशासन विभाग को स्वीकृत इस प्रोजेक्ट की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डाॅक्टर सपना शर्मा हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत यह पता लगाया जा रहा है कि बुनकर और हथकरघा से जुड़ी महिलाएं, जो कि वस्त्र मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकृत हैं, वह स्वरोजगार से कितना जुड़ पाई हैं और उन्हें सरकार की योजनाओं का कितना लाभ मिल पाया है। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रारंभिक शोध की रिपोर्ट को एनआईटी में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं कि जिन महंगे हिमाचली शॉल और परिधानों को तैयार करने वाली महिलाओं के हाथ खाली हैं, इन महिलाओं का न तो सामाजिक और न ही आर्थिक उत्थान हो सका है। केंद्रीय मंत्रालय के पोर्टल पर पंजीकरण के बाद इन महिलाओं को बुनकर अथवा हथकरघा से जुड़ी विद्या का पहचान पत्र तो मिला है, लेकिन उन्हें अपने जीवन में कोई खास लाभ नहीं मिला है।

ऐसे हुआ शोध, 400 महिलाओं से सीधी बातचीत
वस्त्र मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर इन महिलाओं को पंजीकृत कर स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास तो जरूर हुए हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में अधिकतर महिलाओं को योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। इस पोर्टल पर कुल्लू से सबसे अधिक 6221, मंडी से 4070 और कांगड़ा से 2820 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों से बेहद कम महिलाएं पंजीकृत हैं। इस शोध में 400 के करीब महिलाओं से शोधार्थियों ने सीधी बातचीत की है। महिलाओं से 20 के करीब सवाल पूछे गए हैं। शोध का दायरा तीन जिलों कुल्लू, मंडी और कांगड़ा रहा है, जहां से अधिक महिलाएं पोर्टल पर पंजीकृत हैं।
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एक साल में पूरा होगा शोध
एक साल में यह शोध पूरा होगा। शोध में यह पाया गया है कि 70 फीसदी के करीब महिलाएं महज मजदूर बनकर रह गई हैं। ब्लाॅक कुल्लू और मंडी जिले के बालीचौकी ब्लाॅक में 40 फीसदी के करीब महिलाएं योजनाएं का बेहतर लाभ ले पा रही हैं, जबकि शोध में यह पाया गया है कि पंजीकृत महिला कारीगर में से 70 फीसदी के करीब सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रही हैं। प्रदेश में मंत्रालय के पोर्टल पर बेहद कम महिलाएं पंजीकृत हैं, लेकिन गैर पंजीकृत महिला कारीगरों को भी योजना का फायदा तो दूर अपनी कारीगरी का सही मेहनताना तक नहीं मिल पा रहा है।
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