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मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षु डॉक्टरों की सुरक्षा दांव पर

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हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में प्रशिक्षु डॉक्टरों की सुरक्षा दांव पर है। कॉलेज प्रबंधन यहां प्रशिक्षु डॉक्टरों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था नहीं कर पाया है। जिसके चलते इस कॉलेज प्रबंधन में मेडिकल की शिक्षा हासिल कर रहे प्रशिक्षु डॉक्टरों को निजी भवनों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। निजी भवनों में इन विद्यार्थियों को वह सुविधा नहीं मिल पा रही जो आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज के सरकारी हॉस्टलों में उपलब्ध है।
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सबसे अधिक परेशानी महिला प्रशिक्षु डॉक्टरों को हो रही है। जिन्हें कॉलेज आने और जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिन निजी भवनों में यह छात्राएं रहने को मजबूर हैं, वहां पर सुरक्षा कर्मी और अन्य सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इसके अतिरिक्त यह निजी भवन मेडिकल कॉलेज में लगने वाली कक्षाओं से काफी दूर हैं। अधिकतर समय विद्यार्थियों का सफर में ही बर्बाद हो रहा है।
बीते साल अगस्त माह से हमीरपुर मेडिकल कालेज में एमबीबीएस के प्रथम बैच की पढ़ाई शुरू हुई है। लेकिन, छह माह बीत जाने के बावजूद कालेज प्रबंधन विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था नहीं कर पाया है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थी परेशान हैं। विद्यार्थियों ने स्थायी हॉस्टल की व्यवस्था करनी की मांग की है, जहां पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों।
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कालेज के विद्यार्थी कहां रह रहे, नहीं कोई जानकारी : प्राचार्य
डॉ. आरके राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय हमीरपुर के प्राचार्य डॉ. अनिल चौहान ने माना कि कॉलेज प्रबंधन के पास अभी तक प्रशिक्षु डॉक्टरों को ठहराने के लिए हॉस्टल नहीं है। उन्होंने कहा कि कालेज के विद्यार्थी कहां रह रहे हैं, इसकी प्रबंधन को कोई जानकारी नहीं।
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