हमीरपुर। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की 64 करोड़ की लागत से हमीरपुर शहर के लिए बनाई गई नई पेयजल योजना ट्रायल में ही जवाब दे गई है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार में स्वीकृत इस पेयजल योजना का कार्य वर्ष 2014 में शुरू हुआ। टेंडर शर्तों के मुताबिक इसका कार्य वर्ष 2017 में पूर्ण होना था लेकिन, बजट के अभाव में कार्य लटक गया था, जो इसी साल बीते माह पूरा हो चुका है। इस योजना के तहत हमीरपुर शहर में 12 उठाऊ पेयजल टैंकों का निर्माण हुआ है। सुजानपुर के पलाही में बहने वाली ब्यास नदी से पानी को लिफ्ट किया जाएगा।
इस स्कीम को बुधवार को टेस्टिंग के दौरान जब सुजानपुर के पलाही से पानी छोड़ा गया तो पाइपलाइन में जगह-जगह लीकेज के चलते फव्वारे उठे। ग्राम पंचायत देई दा नौण में तो 18 इंच की पाइपलाइन से तेज गति से निकले पानी के कारण गांव में कूहल ही बन गई। पाइपलाइन में लीकेज के कारण देई दा नौण पंचायत के किसानों की हाल ही में बीजी गेहूं खराब हो गई। किसानों में राजेंद्र कुमार, धर्मू देवी और कुंती देवी ने इसकी सूचना तुरंत पंचायत प्रधान को दी। पंचायत प्रधान रंजन शर्मा ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। रंजन शर्मा ने बताया कि जब आईपीएच विभाग ने उनकी पंचायत से पाइपलाइन बिछाने के लिए एनओसी मांगी थी तो उन्होंने 18 इंच की बड़ी पाइपलाइन को अंडरग्राउंड करने की शर्त पर एनओसी प्रदान की थी। लेकिन, कई जगह पानी के पाइप खेतों और रास्तों के सामने से खुले में निकल रहे हैं। जिसके चलते डेढ़ फीट मोटी इस पाइप से जब तेज गति से पानी आएगा तो भविष्य में रिसाव के चलते लोगों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। पंचायत प्रधान और ग्रामीणों ने आईपीएच विभाग से समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की है। उधर, आईपीएच विभाग के अधीक्षण अभियंता एएस चड्ढा का कहना है कि पलाही पेयजल स्कीम की अभी टेस्टिंग चली हुई है। जहां भी रिसाव की शिकायतें आई हैं, वहां समस्या को दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि टेस्टिंग में पास होने के बाद ही विभाग इस स्कीम को चलाएगा।