हमीरपुर। जीएसटी के बाद अब ई-वे बिल की पेचीदगी को लेकर कारोबारी भड़क उठे हैं। पहले से मंदी की मार झेल रहे अधिकतर कारोबारी अब कारोबार छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। इसके पीछे जीएसटी और ई-वे बिल का सरलीकरण न होना सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के प्रदेश संयोजक अमर चंद शर्मा, जिला व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुरेश बजाज, भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सुशील सोनी और शहरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अश्वनी जगोता और मुनीष शर्मा ने कहा कि अधिकतर कारोबारी पंजाब और हरियाणा के अलावा सोलन के बद्दी, परवाणू और नालागढ़ से इलेक्ट्रिॉनिक्स, हार्डवेयर, रेडिमेड गारमेंट्स और खाद्य सामग्री समेत अन्य सामान मंगवा रहे हैं। जीएसटी नियमों के तहत दूसरे जिलों में सामान लाने के लिए ई-वे बिल पर वाहन का पंजीकरण नंबर प्रिंट होना अनिवार्य होता है।
हमीरपुर आते समय कई बार रास्ते में गाड़ियों में तकनीकी खराबी आ जाती है। जिसके कारण सामान को दूसरे वाहनों में लोड करना पड़ता है। वाहन चालक के पास न तो ज्यादा शैक्षणिक योग्यता होती है और न ही जीएसटी व ई-वे बिल का ज्यादा ज्ञान। जिस कारण कई बार रास्ते में आते समय एक्साइज विभाग की कार्रवाई का शिकार होना पड़ रहा है। कई बार एक से डेढ़ लाख रुपये तक पेनल्टी देनी पड़ रही है। कारोबारियों का कहना है कि सामान का जीएसटी समेत अन्य सभी प्रकार के टैक्स के भुगतान के बावजूद मोटी पेनल्टी से आर्थिक नुकसान के अलावा कारोबारियों का मनोबल गिर रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस तरह की जटिल नियमों में सरलीकरण कर एक्साइज विभाग को भी उचित निर्देश दिए जाएं, ताकि कारोबार सही चले। चूंकि एक कारोबारी के पास 20 से 25 लोग भी काम करते हैं, इस तरह की कार्रवाई से सेल्समैन समेत अन्य लोगों का परिवार भी प्रभावित होता है। उधर, उपायुक्त राज्य आबकारी एवं कराधान कुलभूषण गौतम ने कहा कि ई-वे बिल में दूसरी गाड़ी का नंबर होने पर कोई कारोबारी पेनल्टी से बचने के लिए अपील कर सकता है।
यह है ई-वे बिल की शर्तें
जीएसटी नियमों के तहत 50 हजार से अधिक की खरीद पर ई-वे बिल अनिवार्य है। ई-वे बिल में वाहन का पंजीकरण नंबर और क्रय किए सामान की जानकारी रहती है। ई-वे बिल न होने पर संबंधित सामान पर दोगुना टैक्स पेनल्टी का प्रावधान है। अगर किसी वस्तु पर 28 फीसदी जीएसटी के भुगतान करने के बाद रास्ते में बिना ई-वे बिल सामान पकड़ा जाता है तो उस पर 56 फीसदी पेनल्टी लग सकती है। अगर कोई व्यक्ति 50 हजार से अधिक का एक मोबाइल फोन या एलईडी भी कहीं से बस में भी मंगवाता है तो ई-वे बिल अनिवार्य है।