अमर उजाला ब्यूरो
सुजानपुर(हमीरपुर)।
स्थानीय कस्बे में शिलान्यास के बाद भी रेहड़ी-फड़ी वालों को पक्की दुकानें नहीं मिल पाई हैं। आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने 2016 में रेहड़ी-फड़ी वालों को पक्की दुकानें देने के लिए शिलान्यास किया था। शिलान्यास करने के बाद भी दुकानों का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। स्थानीय नगर परिषद ने रेहड़ी-फड़ी वालों को एक वर्ष के भीतर पक्की दुकानें देेने का आश्वासन दिया था, परंतु शिलान्यास को एक वर्ष बीत जाने के बाद भी दुकानों का निर्माण नहीं हो पाया है।
दुकानों के निर्माण के लिए बजट का प्रावधान नहीं किया जा सका है। कई वर्षों से रेहड़ी-फड़ी वाले कस्बे में उनके लिए पक्की दुकानें बनाने की मांग करते आए हैं। नप की ओर से बिना बजट का प्रावधान किए पक्की दुकानों का शिलान्यास करवा दिया। इस बारे में नप ने बजट का प्रावधान रेहड़ी-फड़ी वालों से ही करने का निर्णय लिया था, लेकिन यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। इस कारण कस्बा में पक्की दुकानों का निर्माण कार्य नहीं हो सका।
इसके चलते कस्बे के रेहड़ी-फड़ी धारक धूप और बारिश में ही व्यापार करने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि पक्की दुकानें बनाने के लिए न तो भाजपा के नुमाइंदे कुछ कर पाए हैं और न ही कांग्रेस के नेता। सरकार और नप क ओर से दुकानों के लिए बजट उपलब्ध न करवाने के कारण दुकानों का निर्माण नहीं हो पाया है। वहीं रेहड़ी-फड़ी धारक इतनी राशि का प्रावधान करने में असमर्थ हैं। इस बारे मे रेहड़ी-फड़ी यूनियन के प्रधान अशोक मेहरा का कहना है कि राणा ने दुकानें बनाने का वायदा काफी समय पहले किया था। उन्होंने इन दुकानों के निर्माण का शिलान्यास कर मात्र वाहवाही लूटी है। यूनियन के महासचिव दिनेश डोगरा का कहना है कि राजनीतिक दल हमेशा जनता को गुमराह करते हैं। नप के पार्षद आशुतोष शर्मा का कहना है कि शिलान्यास से पहले ही रेहड़ी-फड़ी धारकों ने धनराशि जमा करने की जिम्मेवारी ली थी।
पक्की दुकानें बनाकर देंगे
सुजानपुर से भाजपा के उम्मीदवार एवं मुख्यमंत्री प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल का कहना है कि विस चुनावों के बाद रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए पक्की दुकानों का निर्माण करवा दिया जाएगा।
नप के कारण काम लटका
कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र राणा का कहना है कि सुजानपुर नप में अधिकतर भाजपा के समर्थक नुमाइंदे हैं। इस कारण दुकानों का कार्य लटक रहा है। यह कार्य नगर परिषद द्वारा करवाया जाना है।