हमीरपुर।
जिला मुख्यालय में अतिक्रमण ने पांव पसार लिए हैं। शिक्षा विभाग की भूमि पर कभी रात के अंधेरे में तो कभी दिन के उजाला में अवैध निर्माण हो रहा है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन धारण करके बैठे हैं।
इससे नाराज लोगों ने सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर जिला मुख्यालय पर ही अवैध निर्माण हो रहा है तो जिला के दूरदराज के क्षेत्रों की सुध कौन लेगा। हमीरपुर बाल स्कूल की भूमि पर अभी तक आधा दर्जन अवैध भवनों का निर्माण हो चुका है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है।
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बाल स्कूल हमीरपुर की जमीन पर नगर परिषद ने कुछ साल पहले रेन शेल्टर, एक दुकान और सुलभ शौचालय का निर्माण किया था। इसकी आड़ में अब कुछ लोगों ने भी शिक्षा विभाग की जमीन पर अवैध भवन खड़े कर दिए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने गत माह नगर परिषद द्वारा बनाई गई दुकान को तोड़ने संबंधी आदेश जारी किए थे, लेकिन दुकानदार ऐन मौके पर न्यायालय से स्टे आर्डर ले आया। अब मामला न्यायालय में विचाराधीन है। अब शिक्षा विभाग की भूमि पर कुछ अन्य लोगों द्वारा किए जा रहे निर्माण पर किसी की नजर नहीं है। जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन ने शिक्षा विभाग की जमीन पर हुए अवैध निर्माण की रिपोर्ट तैयार कर ली है। राजस्व विभाग से करवाई गई निशानदेही के बाद शिक्षा विभाग की जमीन पर आधा दर्जन भवन अवैध पाए गए हैं, जिनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दुकान तोड़ने से हुआ नुकसान : नंदा
नगर परिषद ने दुकान का निर्माण करने के बाद इसे किराये पर नंदा इलेक्ट्रिकल को दिया। नंदा इलेक्ट्रिल के मालिक का कहना है कि वह सालों से हर माह किराय दे रहे हैं। लेकिन गत माह उनकी दुकान को तोड़ने का प्रयास हुआ। इससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने बताया कि तोड़फोड़ के दौरान दुकान की दीवारें तो टूटी हैं। साथ ही दुकान के भीतर रखा सामान भी नष्ट हुआ है। उन्होंने मुआवजे की मांग की है। चूंकि यह दुकान नगर परिषद की है और वह एक किरायेदार हैं।