हमीरपुर। जिले की गोशालाओं की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। पिछले चार महीनों में जिले की विभिन्न गोशालाओं में 177 गोवंश की मौत हो चुकी है, जबकि इसी अवधि में केवल 118 नए लावारिस पशुओं को ही आश्रय मिला है।
यानी जितने पशुओं को गोशालाओं में जगह मिली, उससे अधिक की मौत दर्ज हुई है। इससे गोशालाओं के रखरखाव और प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जिले में वर्तमान में 28 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब 2300 गोवंश रह रहे हैं। इनके रखरखाव के लिए सरकार प्रति पशु प्रतिमाह 1200 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में गोवंश की मौत चिंता का विषय बनी हुई है।
गोशालाओं के प्रबंधन की ओर से पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, समय पर उपचार और बेहतर देखभाल के दावे किए जाते हैं, लेकिन लगातार हो रही गोवंश की मौत इन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है।
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1200 लावारिस गोवंश खुले में घूम रहे
जिले में अभी भी करीब 1200 लावारिस गोवंश खुले में घूम रहे हैं। ये पशु सड़कों पर यातायात और वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। वहीं, खेतों में घुसकर किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे आमजन और किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि गोशालाओं में भेजे जाने से पहले सभी लावारिस पशुओं की टैगिंग की जाती है, लेकिन सीमित क्षमता और कमजोर प्रबंधन के चलते बड़ी संख्या में पशु अब भी आश्रय से वंचित हैं।
किस माह कितने गोवंश की मौत
मार्च में जिले की गोशालाओं में 52 गोवंश को पनाह मिली, जबकि इसी महीने 48 गोवंश की मौत हुई। मई में 47 पशु गोशाला में आए और 37 की मौत हुई। मई माह में पांच पशु गोशालाओं में आए, जबकि 40 पशुओं की मौत हुई। जून में 14 पशु गोशाला में आए और 52 पशुओं की मौत हुई।
कोट
हर माह गोशाला में भेजे जाने वाले और मरने वाले गोवंश की जानकारी उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। लावारिस गोवंश के लिए सरकार बेहतर प्रयास कर रही है।
-सुजय शर्मा, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हमीरपुर