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गलोड़ अस्पताल में बती गुल, रेडियोलोजिस्ट भी नहीं पहुंचा

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महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को होते हैं अल्ट्रासाउंड - फोटो : अमर उजाला
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सुनील कुमार

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गलोड़ (हमीरपुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गलोड़ में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। खासकर गर्भवती और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गलोड़ अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन रेडियोलाजिस्ट न होने से मशीन धूल फांक रही है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को जिला अस्पताल से रेडियोलोजिस्ट को डेपुटेशन पर भेजने की व्यवस्था की है। लेकिन शनिवार को रेडियोलोजिस्ट अस्पताल ही नहीं पहुंच पाया। इसके साथ ही गलोड़ क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित होने से अस्पताल में अंधेरा रहा।

अस्पताल में सुबह नौ बजे ही करीब 40 से 45 महिलाएं अल्ट्रसाउंड के लिए पहुंच चुकी थीं। रेडियोलोजिस्ट के न आने से उनको निराशा का सामना करना पड़ा। स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है कि गर्भवती को अल्ट्रसाउंड के लिए तारीख दी होती है, जिसके चलते निर्धारित तिथि को अल्ट्रसाउंड करवाना जरूरी रहता है। गलोड़ अस्पताल में रेडियोलोजिस्ट के न आने पर गर्भवती महिलाओं को मजबूरन क्लीनिक का रुख करना पड़ा।
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महिलाओं निशा, आशा, सुषमा, सत्या, सरोती, सपना, मीना, सीमा और अनीता ने बताया कि प्रदेश सरकार गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क सुविधाओं का ढिंढोरा पीट रही है लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गलोड़ अस्पताल में गलोड़ खास पंचायत, आहल, सरेडी, ब्राहलड़ी, कश्मीर, हरेटा, मैड़, गाहली समेत आसपास की दर्जनों पंचायतों के लोग उपचार के लिए आते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. मोहित डोगरा का कहना है कि अस्पताल में हर माह दूसरे और चौथे शनिवार को अल्ट्रसाउंड होते हैं। लेकिन इस बार शनिवार को रेडियोलोजिस्ट के नहीं आया। इसके चलते मरीजों को असुविधा हुई है।

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