बड़सर(हमीरपुर)। उपमंडल बड़सर के किसान लावारिस पशुओं से फसलों की सुरक्षा करने के लिए पहरा देने को मजबूर हैं। क्षेत्र में लावारिस पशुओं से निजात दिलाने में प्रदेश की सरकारें पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही हैं। सरकार की पंचायतों में गौसदन बनाने की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई है। किसान लावारिस पशुओं से फसलों को बचाने के लिए कांटेदार बाड़ लगा रहे हैं। इसके बावजूद लावारिस पशु फसलों को तबाह कर रहे हैं। क्षेत्र के किसानों ने लावारिस पशुओं से निजात के लिए ठोस योजना बनाने की मांग की है। बड़सर उपमंडल की पंचायतों बड़सर, बल्याह, ग्यारह ग्रां, उसनाड़, झंझयाणी, घंघोट, क्याराबाग, बणी, गारली, ननावां, भकरेड़ी सहित अधिकतर पंचायतों के लोग लावारिस पशुओं से परेशान हैं। पंचायतों के कई गांवों में किसान रात को पहरा दे रहे हैं। कई पंचायतों के लोगों ने पहरेदार रखे हुए हैं। इसके बावजूद लावारिस पशु फसलों को तबाह कर दे रहे हैं।
किसानों ने फसल सुरक्षा का प्रबंध करने के लिए सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग कई बार की है। इसके बावजूद कोई ठोस प्रबंध नहीं हो पाया है। गारली पंचायत क्षेत्र के गांवों गारली, बाहिना, कोटलू, करमाकड़, बनन, मोहलवीं तथा खेड़ी आदि गांवों में फसलों की रखवाली को पहरेदार रखा हुआ है। क्षेत्र के किसानों लेख राम, देश राज, देव राज, करतार सिंह, हाकम सिंह, राकेश कुमार, संजीव ङ्क्षसह, भाग सिंह, पृथी सिंह, हंसराज, केशव दत्त, हरिचंद, चंद्र स्वरूप, कमलजीत, मनोज कुमार, राजेंद्र कुमार, सुरेश कुमार का कहना है कि इस पर उनका लागत से अधिक खर्च हो रहा है। क्षेत्र के किसानों जगदीश चंद, हंस राज, देश राज का कहना है कि पहले महंगे बीज, खादी, बुआई, कटाई आदि पर काफी खर्च हो रहा है। कई किसानों ने कांटेदार बाड़ तक लगा ली है। उन्होंने सरकार से लावारिस पशुओं से फसलों को सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
उधर, एसडीएम बड़सर धनवीर ठाकुर का कहना है कि कई पंचायतों को गौसदन बनाने के लिए भूमि उपलब्ध करवाई थी, लेकिन बजट राशि का प्रावधान नहीं होने से समस्या बनी रही। उन्होंने कहा कि बजट होने पर पंचायतें ठोस प्रयास कर सकती हैं।